महाराष्ट्र में कुर्सी का खेल !

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महाराष्ट्र में कुर्सी का खेल
महाराष्ट्र में कुर्सी का खेल

महाराष्ट्र में कुर्सी का खेल महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार पूरी तर बैकफुट पर है । 40 से अधिक विधायकों के टूटने की खबर है और इसपर किसी भी वक्त मुहर लग सकती है । बीजेपी हर हाल में सरकार बनाना चाहती है इसलिए टूटे हुए विधायकों से संपर्क रखने के अलावा उनके हवाई जहाज के टिकट खरीदने से लेकर होटल में रुकवाने का सारा खर्च बीजेपी उठा रही है । सवाल यहाँ ये नहीं है कि महाराष्ट्र में सरकार कौन बनाएगा या बचाएगा । सवाल यहाँ ये है कि सरकार किसी की भी बनें, क्या आम जनता जिसने वोट देकर सरकार बनाई है, उसका कुछ भला होगा । राम का नाम दोनों ही तरफ से खूब इस्तेमाल हो रहा है, हिंदू हो जाने और हिंदुत्व का कार्ड दोनों तरफ से खेला जा रहा है पर क्या सरकार बनने के बाद असली काम, जिसे राजनीति में जनसेवा कहते हैं, वो होगा ?

खबर यही है कि बीजेपी सत्ता पर वापिस आ सकती है और मौजूदा सरकार टूट सकती है लेकिन ये कैसे होगा और कब होगा, महाराष्ट्र में कुर्सी का खेल

ये वक्त ही बताएगा । देश की आम जनता, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें, नौकरी, इंन्फ्रास्ट्रक्चर चाहिए, उसे क्या मिल रहा है और क्या नहीं मिल रहा । आज देश में अधिकतर राज्यों में भाजपा सरकार पर काबिज है, तो क्या वहां ये सब समस्याएं हल हो चुकी हैं, वहीं शिवसेना को भी महाराष्ट्र में लंबा समय हुआ है, इतने समय में शिवसेना ने महाराष्ट्र के लिए क्या किया । ये सब आंकलन करते रहना चाहिए । वो जनता जो टीवी पर कुर्सी का ये तमाशा देख रही है, उसे अपने लिए इस विषय पर सोचना होगा । महाराष्ट्र में कुर्सी का खेल

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कोई नेता बन जाएगा, कोई मंत्री, कोई उपमुख्यमंत्री और कोई मुख्यमंत्री, लेकिन इसके बाद क्या ?

क्या वो जनता जिनके बल बूते ये सब पद और स्थान पाते हैं, जनता को कुछ देंगे । सत्ता हासिल करना आसान है लेकिन सत्ता की गरिमा बनाए रखना उतना आसान नहीं है । ये बात सिर्फ भाजपा और शिवसेना की नहीं है, ये हर राजनितिक दल को लेकर है । आप जनता के पास वोट मांगने जाते हैं, वादे करते हैं, जनता आपपर भरोसा करती है और आपको वोट करती है । यदि उसके बाद जनता के साथ विश्वासघात होता है जो जिम्मेदार भी क्या जनता है । खबर वाले खबर बनाकर निकल जाएंगे, कुर्सी वाले कुर्सी लेकर लेकिन वो जो रेहड़ी लगा रहा है, फल-सब्जी बेच रहा है, ऑफिस जा रहा है, माँ-बाप, बीवी-बच्चे को संभाल रहा है, जिसको दवाई का खर्च भी देना है और अस्पताल की फीस भी, जिसको घर का राशन भी लाना है और बच्चों की फीस भी देनी है, उसे क्या कुछ मिलेगा । ये सब सोचने की बात है और नेता ये सब बिल्कुल नहीं सोचेगा, इसलिए हम सभी जो रोज़ाना की व्यस्त ज़िंदगी से टाइम निकालकर खबरें देख रहे हैं, हमें यहाँ भी अपने की पैरों पर खड़ा होना पडे़गा और अपना ही दिमाग लगाना पड़ेगा । 

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, ये वो देश है जहां संस्कार बसते हैं, यहाँ क्षमा है, आदर है इसलिए सभी का आदर करते हुए सत्ता के इस खेल को देखते रहें और स्वंय मूल्यांकन करें कि आपको किसे चुनना है और क्यों चुनना है ।

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