सरिता भाभी के साथ मस्ती (Chudai ki kahani)

सरिता भाभी के साथ मस्ती

मेरा नाम अनुराग है और मैं कानुपर, उत्तर प्रदेश में रहता हूं । मैं अपनी कहानी बता रहा हूं ताकि मेरी तरह कोई और सरिता भाभी का शिकार न बने । बात पिछले साल की है ।

पापा का ट्रांसफर लखनऊ से कानपुर हो गया और हम कानपुर आ गए । ये सरकारी कॉलोनी थी और गिने चुने 16 फ्लैट थे । इस वजह से सब एक दूसरे को जानते थे, मेरे सामने वाले घर में भैय्या और भाभी रहा करते थे। सरिता भाभी के साथ मस्ती (Chudai ki kahani)

भैय्या को अक्सर काम की वजह से ट्रांसफर मिलता रहता था । इस वजह से वो अक्सर बाहर ही रहते थे । एक रोज़ की बात है भैय्या घर आए हुए थे, मैं सुबह दूध लेन गया तो मुझसे हाल पूछने लगे ।

बहुत ही सीधे और शरीफ हैं, अपने काम से काम रखते हैं, उन्हें देखकर लगता ही नहीं कि वो सरकारी कर्मचारी हैं ।

शायद यही वजह है कि उनकी बीवी यानी सरिता भाभी और मेरे बीच वो हुआ जो वो कभी सोच भी नहीं सकते । लेकिन कहीं न कहीं कमी उनकी भी थी । हुआ यूं कि एक दिन मैं जल्दी उठ गया और छत पर टहलने चला गया ।

सरिता भाभी के साथ मस्ती (Chudai ki kahani)
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मेरी छत से भाभी के कमरे की खिड़की दिखती थी, मैनें देखा कि भाभी भैया के ऊपर चढ़कर चुद रही थी पर भैय्या सरिता भाभी को चोद नहीं पा रहे थे ।

भाभी बार बार भैया से खुद को झटके लगवाने की कोशिश कर रही थी लेकिन भैया झटके नहीं लगा पा रहे थे और आखिर में भाभी थक कर उठ गई और ब्रा पहनने लगी ।

मुझे भाभी पर तरस तो आया लेकिन मैनें सरिता भाभी का जो जिस्म देखा था उसे सोचकर मैनें सुबह-सुबह भाभी के नाम की मुठ्ठ मार ली । Chudai ki kahani

भाभी के चूचे बहुत बड़े थे और एकदम टाइट । उन चूचों पर काले निप्पल थे जिसे भैया चूसने की कोशिश कर रहे थे लेकिन भैया का बहुत जल्दी झ़ड़ गया और इसीलिए वो चूसना छोड़ देते थे ।

वहीं भाभी की चूत एकदम गुलाभी रंग की थी जिसे वो भैय्या को चूसवाना चाह रही थी लेकिन झ़ड़ने की वजह से भैय्या उसे चूत को चाट नहीं पा रहे थे ।

भाभी की हालत मुझसे देखी नहीं जा रही थी और एक सच यह भी था कि अब मैं भाभी की चूत का प्यासा बन चुका था ।

जबसे मैनें भैय्या को सरिता भाभी को चोदते हुए देखा तब से मेरी एक ही इच्छा है कि किसी भी तरह बस सरिता भाभी मुझे चूत दे दे ।

एक दिन मैनें देखा कि भैय्या फिर कहीं पोस्टिंग के चलते जा रहे हैं और अब मेरे लिए मौका था । मैंने भी को हर जगह फौलो करना शुरु कर दिया ।

सरिता भाभी कभी पजामें, कभी साड़ी तो कभी सूट में दिख जाती थी लेकिन हर तरह के कपड़ों में उनके चूचे पूरी तरह आकार में दिखाई देते थे ।

अब मैं भाभी को रोज़ देखा करता था और छत पर उनकी कपड़ों के साथ सूखने वाली ब्रा और पैंटी को चोरी छुपे सूंघा भी करता था ।

मुझे किसी भी हाल में सरिता भाभी की चूत चाटनी थी ।

एक दिन मेरे फोन पर मैसेज आया – हाय, कैसे हो ?

मैनें जवाब दिया – मैं ठीक हूं पर आप कौन ?

जवाब आया – मैं सरिता, आपके पड़ोस की भाभी ।

मैनें जवाब दिया – मैं ठीक हूं आप कैसे हैं ?

उसने लिखा – मैं सैक्स की आग में जल रही हूं, मुझे पता है तुम मुझे देखते हो और पसंद भी करते हो ।

मैनें कहा  – आपको कैसे पता ?

भाभी ने जवाब दिया – मैनें तुम्हें मेरी पैंटी पर मुठ मारते हुए देख लिया था ।

अगर चूत मारनी है तो आज शाम मेरे घर आ जाना, मस्ती करेंगे ।

मैं बहुत खुश हो गया और शाम होते ही मैं उनके घर पहुंच गया । भाभी ने बस एक गाउन पहना हुआ था और वो मुझे तब पता चला जब मैनें भाभी का गाउन उतार दिया ।

गाउन उतरते ही भाभी पूरी नंगी हो गई और भाभी को नंगा देखकर मैं दिवाना हो गया क्योंकि मैनें भाभी को कभी इतनी करीब से नहीं देखा था । मैनें भाभी के चूचों पर हाथ लगाया और धीरे-धीरे दबाने लगा । थोड़ी देऱ में चूचों को दबाते-दबाते चूसने लगा ।

भाबी मदहोशी में जा रही थी और मैं अपना सपना पूरा कर रहा था । मैं भाभी की चूत की सारी चिकनाई अपने लंड से निकालना चाहता था इसलिए मैं कुर्सी पर बैठ गया और मैनें भाभी से लंड पर बैठने को कहा । Chudai ki kahani

भाभी ने कहा – नहीं, मैं राइडिंग नहीं कर सकती, इसमें बहुत दर्द होता है । लेकिन दर्द की मज़ा देता है और इस दर्द का इंतज़ार हर लड़की को चाहिए होता है । मैनें भाभी को जबरदस्ती लंड पर बिठा दिया और लंड पर उछालने लगा ।

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भाभी हर झटके के साथ आह….आह…कि सिसकी ले रही थी और मैं भाभी को झटके देने में बिजी था लेकिन तभी भाभी उठकर बिस्तर पर लेट गई और घोड़ी बनकर बोली – घोड़ी बनाकर चोद दो, मैं आज तक घोड़ी बनकर नहीं चुदी हूं…प्लीज़ ।

मैनें भाबी के बाल पकड़े और भाबी को जोर जोर से झटके देने लगा ।

आ……..आ……..और जोर से…….आ………..आह….. क्या करता । आज भाभी अपनी चुदाई में पूरी तरह मगन हो रखी थी, मैनें भाभी को चोदने से पहले मुठ मार ली थी और इसी वजह से मैं भाभी को सटा-सट चोद रहा था और भाभी मुझसे बहुत खुश थी ।

अब मैं पूरी तरह भाभी को संतुष्ट कर चुका था लेकिन अभी भी कुछ कमी सी थी । भाभी के मन की सारी इच्छाएँ अभी खत्म नहीं हुई थीं । भाभी की गांड ऐसी थी जैसे पनीर की तरह एकदम मुलायम और इसीलिए भाभी को चोदने में मज़ा आ रहा था ।

भाभी की चूत से पानी गिरना शुरु हो चुका था । मैनें फौरन भाभी को पलटाया और बिस्तर पर लेटा दिया और खुद ऊपर आ गया । अब ऊपर से चुदाई का वक्त था तो मैनें भाभी को ठोकना फिर शुरु कर दिया ।

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पच…पच….पच  बस यही आवाज़ आ रही थी और भाभी बस यही कह रही थी – थोड़ा और जोर से चोदो…..और जोर से । भाभी के साथ बिताया हर पल मुझे आज भी याद है । Chudai ki kahani

भाभी अपने चूचों को दबाने का काम करती थी और यही वजह थी जो भाभी के चूचे अब पूरी तरह उनकी पकड़ से बाहर आ चूके थे ।

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