Ashram Me Rasleela

1
Ashram Me Rasleela
Ashram Me Rasleela

Ashram Me Rasleela आश्रम में रासलीला गुरूजी सतनाम का आश्रम बहुत मशहूर था । लोग पूरे देश से यहाँ बाबाजी का आशिर्वाद लेने आते थे । बाबाजी का आश्रम बहुत सुंदर था और काफी फैला हुआ था । कंचन एक साल पहले तिवारी परिवार की बहू बनकर आई थी और बहुत खुश थी । लेकिन कंचन के सास-ससुर खुश नहीं थे और वही कंचन को बाबाजी के आश्रम लेकर आए । कंचन एक पढ़ी-लिखी लड़की थी, उसे ये बाबा और आश्रम बिल्कुल पसंद नहीं था लेकिन घर और सास-ससुर की शांति के लिए वो यहाँ आई ।

समस्या ये थी कि कंचन और उसके पति राजेश ने बच्चे के लिए काफी बार ट्राई किया लेकिन बच्चा नहीं हो पा रहा था और उसके बाद वो डॉक्टर के पास भी गए और चेकअप भी कराया । लेकिन रिपोर्ट एकदम नॉर्मल आई और डॉक्टर समझ नहीं पा रहा था कि हुआ क्या है । जब सास-ससुर ने कंचन से पूछा तो कंचन ने राजेश को कहा कि बता दीजिए कि क्या प्रॉब्लम है।

Ashram Me Rasleela राजेश ने जैसे ही बताया, राजेश के पिता बोले –

अरे, बस इतनी सी बात, ये तो बाबा सतनाम के बाएं हाथ का काम है । कंचन वहां से उठी और सीधे अपने कमरे में चली गई । राजेश पीछे से गया और कहा – क्या हुआ, ऐसे उठकर क्यों चली आई ? कंचन – ये क्या है यार, एक तो हम दोनों ऐसे ही परेशान हैं और मम्मी-पापा बाबा के चक्कर में हैं, ऐसा थोड़ी होता है । राजेश – हाँ, मैं जानता हूं, लेकिन घर की शांति के लिए और इनकी तसल्ली के लिए चली जाओ एक बार, नहीं तो इनके मन में खटकता रहेगा ।कंचन – ठीक है, लेकिन सिर्फ एक बार जाऊंगी, बार-बार नहीं ।राजेश – हाँ, हाँ ठीक है ।

अगले दिन कंचन सास-ससुर के साथ आश्रम पहुंची और बाबा सतनाम को देखा ।

बाबा तो सिर्फ नाम से ही थे, ये तो 30-35 साल का नौजवान आदमी था जो शरीर, कद-काठी और चेहरे से एकदम हीरो लगता था । दाढ़ी भी गहरी और शानदार थी औक उजले कपड़े पहने हुए थे । कंचन तो बाबा सतनाम को देखती ही रह गई और उसे लगा कि ये तो पढ़ा लिखा भी होगा ।

जैसे ही कंचन के सास-ससुर ने बाबा सतनाम को प्रणाम किया,

ji बाबा ने कहा – नाम कंचन है, एक साल पहले शादी हुई है लेकिन संतान से वंचित है । चिंता न करो, संतान प्राप्ति में अभी समय है, लेकिन होगी ज़रूर । कंचन ने कहा – आप ये सब कैसे जानते हैं ?बाबा सतनाम – जो हमारी शरण में रहते हैं, हम भी उनके और उनके परिवार के लिए चिंतित रहते हैं, तो चौंको मत ।कंचन – लेकिन बच्चा कब तक होगा ?बाबा सतनाम – अभी समय है, सुना है तुम पीएचडी हो ?कंचन – जी बाबाजी, मैनें 2 साल पहले ही कंप्लीट किया है ।बाबा सतनाम – तो नौकरी ढूंढों और नौकरी करो, संतान की चिंता छोड़ दो ।

ये सब सुनकर कंचन बहुत इंप्रैस हुई ।

उसे लगा कि बाबा सतनाम भी औरों की तरह झोलाछाप बातें करेगा, फिर कुछ मंत्र फूकेगा और कुछ जड़ी-बूटी देकर कहेगा, जाओ इसका पालन करो, संतान प्राप्ति हो जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ । बाबा सतनाम ने कंचन की बनाई हुई सोच को तोड़ दिया । कंचन ये सोचकर आई थी कि वो आज के बाद यहाँ नहीं आएगी लेकिन बाबा को देखकर और उनकी बातें सुनकर वो बाबा सतनाम से इंप्रैस हो गई और अब वो यहाँ आ सकती थी ।

कंचन घर पहुंची और राजेश से कहा –

इंडिया बदल रहा है, अब पढ़े-लिखे, स्मार्ट और हैंडसम बाबा बन रहे हैं, बाप रे, देखने में कितना हैंडसम लगता है और नाम रखा है – बाबा सतनाम, हा हा हा । कंचन तो हंसकर चली गई लेकिन राजेश को थोड़ी जलन महसूस हुई क्योंकि वो बाबा सतनाम के बारे में कुछ गलत सुन चुका था और वो बिल्कुल नहीं चाहता था कि कंचन वहाँ जाए लेकिन माँ-बाप की वजह से वो कुछ न बोल पाया और फिर उसे कंचन पर बहुत भरोसा भी था ।

अब कंचन और राजेश अपने-अपने काम में बिज़ी हो गए और कभी-कभी सास-ससुर के साथ कंचन आश्रम भी जाती थी । एक दिन बाबा सतनाम के आश्रम से एक चेला राजेश के घर आया । राजेश ऑफिस जा चुका था तो उसे राजेश के पिताजी मिले । उसने कहा – कल आप अपनी बहु को लेकर आश्रम आइए, बाबाजी ने बुलाया है ।

राजेश के पिता – क्या हुआ, कुछ बाता है क्या ?

चेला – नहीं, कुछ खास नहीं, बस बाबाजी आपकी बहु को प्रसाद देंगे ।राजेश के पिता – ठीक है, ले आऊंगा ।
अगले दिन कंचन अपने ससुर के साथ आश्रम पहुंची तो आश्रम में एक ध्यान कक्ष था और बाहर लिखा था – केवल एक व्यक्ति ही भीतर आएगा । अंदर से चेला बाहर आया और बोला – आप यहाँ बैठिए, बाबाजी ने इन्हें बुलाया है ।

राजेश के पिता ने कहा – ठीक है बहु, मैं यहाँ बाहर बैठा हूं, बाबाजी जो कहें, चुपचाप करना और पालन करना ।कंचन ने कहा – ठीक है पापा ।
ये कहकर कंचन अंदर चली गई । अंदर देखा तो बाबा सतमाम सिर्फ लुंगी पहने आंखें बंद करके ध्यान कर रहे थे और कंचन बाबा सतनाम के गठीले शरीर को देख रही थी । बाबा ने अपना शरीर बिल्कुल टाइट किया हुआ था । छाती बाहर, पेट अंदर और बाजू के मसल्स अच्छे । कुल मिलाकर एक टाइट और आकर्षक शरीर । अब चेला उठा और दरवाज़ा बंद करके बाहर की ओर चला गया ।

बाबा सतनाम ने आंखें नहीं खोली और बोले – जीवन में आनंद आ रहा है ?

कंचन ने कहा – जी बाबाजी, आ रहा है ?बाबा सतनाम – राजेश के साथ संबंध ठीक रखो और उसे रिझाओ ।कंचन – बाबा हमारे बीच में सबकुछ अच्छा है लेकिन राजेश काम के बाद थोड़ा थक जाते हैं ।बाबा सतनाम – मैं जानता हूं, आजकल काम के बोझ बहुत है और मैं ये भी जानता हूं कि तुम्हारा मन कब-कब करता है ।कंचन चौंकी और बोली – मतलब ?बाबा सतनाम – मतलब वही तो तुम समझी हो, सच बताओ, तुम्हारा मन रोज़ करता है न ?

कंचन – नहीं बाबाजी, ऐसा कुछ नहीं है बाबा सतनाम –

अपने सास-ससुर, अपने पति और खुद से झूठ बोलना लेकिन हमसे नहीं, हमें ज्ञान है कि तुम्हारा मन अभी विचलित है और यही वजह है जो संतान प्राप्ति नहीं हो पा रही है । कंचन थोड़ा घबरा गई और बोली – बाबाजी कोई उपाय बताइए बाबा सतनाम – हमने तैयारी शुरू कर दी है, ये लो इसे खाओ ।बाबा सतनाम ने कंचन को नारियल का टुकड़ा दिया और खाने के लिए बोला ।

कंचन ने नारियल खाया और बोली – ये तो अजीब सा स्वाद है ।

बाबा सतनाम – अजीब तो होगा ही, ये संतान प्राप्ति का प्रसाद है, बहुत जतन करके इसे तैयार किया है । आज से समझ लो तुम्हारे गर्भ में सक्रियता बढ़ जाएगी । कंचन को ये सब बातें बकावास तो लग रही थी लेकिन वो बाबाजी से इंप्रैस थी और इसी के चलते उसने पूछा – बाबाजी क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूं ?बाबा सतनाम – हाँ पूछो कंचन – बाबाजी आपकी उम्र बहुत कम है अभी और आप इतने अच्छे दिखते हैं,

Ashram Me Rasleela फिर आपने बाबा बनने का क्यों सोचा,

शादी और घरबार की नहीं सोची ?बाबा सतनाम – क्यों आपको मैं बाबा ठीक नहीं लगता क्या ?कंचन – नहीं आप तो बहुत ही आकर्षक हो, इसलिए पूछ रही हूं कि कभी मन नहीं किया कि शादी कर लें ।बाबा सतनाम – नहीं, मुझे इसी में आनंद आता है । बस कंचन की आंखें एकदम से भारी होने लगी और देखते ही देखते वो गहरी नींद में सो गई । जब जागी तो शाम के 4 बज चुके थे और वो आश्रम में 1 बजे आई थी । जब उठी तो सामने सतनाम और उसके चेले थे, वो घबराकर उठी और बोली – बाबाजी मुझे क्या हो गया था ?बाबा सतनाम – कुछ नहीं, प्रसाद दिया था न, उसी का प्रभाव था, अब तुम माँ ज़रूर बनोगी, मेरा आशिर्वाद है ।

कंचन ने हाथ जोड़े और बाहर आ गई लेकिन चलने लगी तो उसे

टांगों के बीच थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन कंचन ने ध्यान नहीं दिया और बाहर आ गई । बाहर ससुर जी बैठे थे, उन्होंने पूछा – क्या हुआ बेटा ?कंचन – कुछ नहीं पापा, बाबाजी ने प्रसाद खिलाया और कहा कि अब संतना ज़रूर होगी और अपना आशिर्वाद दिया है ।ससुर जी ने भगवान को धन्यवाद कहकर हाथ जोड़े और घर आ गए । शाम को जब कंचन कपड़े बदलने लगी तो देखा कि उसके नीचे के कपड़ों में दान लगे हुए हैं और उसे दर्द भी थोड़ा ज्यादा हो रहा है, तो कंचन ने दर्द की दवा खा ली और थोड़ा लेट गई । Ashram Me Rasleela

थोड़ी देर में दर्द चला गया ।

लेकिन अगली सुबह जब कंचन नहाने गई तो उसने अपने शरीर पर हाथों के निशान और अपने निचले भागों पर भी निशान देखे तो उसका माथा ठनक गया, वो समझ गई कि बाबाजी ने उसके साथ क्या किया है । लेकिन ये बात अगर वो किसी से कहेगी तो उसकी बात कोई नहीं मानेगा । कंचन बहुत दुखी हुई और रोने लगी और उसने बहुत सोचा और वो आश्रम चली गई और घर पर कह दिया कि बाबाजी ने अकेले बुलाया है । आश्रम पहुंचकर बाबाजी से मिली और कहा – बाबाजी मुझे आपसे अकेले में बात करनी है ।बाबाजी ने सारे चेलों को कमरे से बाहर कर दिया और बोले – कहो कंचन बाबाजी के पास जाकर बैठ गई और बोली – बाबाजी मैं आपकी शरण में आई हूं, एक दुविधा है, दूर करिए । Ashram Me Rasleela

बाबाजी ने कहा – कहो कंचन – बाबाजी आप मुझे बहुत याद आने लगे हो,

सोते-जागते, हर वक्त आप मुझे दिखाई देते हो, मुझे आपसे प्यार हो गया है और मैं आपकी होना चाहती हूं ।बाबा सतनाम – अच्छा, ठीक है, तो जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो ।कंचन – जीबाबा सतनाम – आओ मेरे साथ और बाबाजी कंचन को अंदर बने एक गुप्त कमरे में ले गए और कहा – अपने शरीर को कपड़ों के बंधन से मुक्त कर दो ।कंचन जो कैमरा अपने पास लेकर आई थी उसने उसे अपने मंगलसूत्र में लगा रखा था वो जानती थी कि बाबा क्या कहेगा ।कंचन ने कपड़े उतारने शुरू ही किए थे कि बाबाजी ने अपने कपड़े पूरी तरह उतार दिए और बोले – आजा , मेरी जांघ पर बैठ जा, आज तूझे झूला झुलाऊंगा, Ashram Me Rasleela

बहुत आनंद आता है ।कंचन – नहीं, मैं नहीं आऊंगी, मुझे डर लगता है ।

बाबा baba सतनाम – देख, तेरी परेशान का इलाज कर रहा हूं, आजा, दोनों आनंद करेंगे ।कंचन ने अपनी साड़ी उतार दी और बाबा के पास आकर बैठ गई । बाबा सतनाम कंचन को चुंबन देने लगा और कंचन कैमरे को सही दिशा में मोड़ देती थी ताकि बाबाजी का चेहरा साफ दिखाई दे । उसके बाद सतनाम ने कंचन का ब्लाउज खोलना शुरू किया और थोड़ी देर में कंचन को बेआबरू कर दिया । कंचन जानती थी कि वो बदनाम हो जाएगी लेकिन वो आज बाबा सतनाम और उसके आश्रम का असली चेहरा दुनिया को दिखाना चाहती थी ।सतनाम ने कंचन को अपने ऊपर बेठा दिया और झुलाने लगा । कंचन भी झुलने लगी और कूदने लगी । बाबा सतनाम कभी कंचन के नीचे आ जाता तो कभी उसके ऊपर आकर उसे अपनी ताकत का अहसास करवाता ।

बाबा सतनाम की हवस सारी सीमाएँ पार कर चुकी थी और वो अपने आपको रोक नहीं पा रहा था ।

Baba बाबा सतनाम ने आंखें बंद कर ली और कंचन के ऊपर आ गया और उसे धक्के मारने लगा । कंचन की आंखों में बदले की आग थी और दूसरे तरफ अपनी जीत की खुशी । वो बाबा के इस कुकर्म में पूरी तरह उनका साथ दे रही थी । कंचन बाबा को चुंबन करने लगी और बाबा भी कंचन के शरीर पर आकर्षित हो चुके थे और उन्हें पूरी तरह खोल कर रखने वाले थे । बाबा कंचन के पीछे आ गए और फिर पीछे से अपना कुकर्म करने लगे । थोड़ी देर में जब बाबा सतनाम की भूख पूरी तरह मिट गई तो उन्होंने कपड़े पहने और कंचन से कहा – जाओ, पुत्र की प्राप्ति जल्द होगी । Ashram Me Rasleela

कंचन चुपाचाप वहां से निकल गई और सीधे पुलिस स्टेशन पहुंची और पुलिस को सबूत दिए

और कहा कि अगर आपने अगले 12 घंटे में बाबा सतनाम को नहीं पकड़ा तो ये वीडियो कोर्ट भी जाएंगी और आप भी नहीं बचेंगे । मुझे सिर्फ इंसाफ चाहिए । पुलिस ने बाबा सतनाम को गिरफ्तार किया और आश्रम को सील कर दिया । कंचन को इस बात की खुशी थी कि उसने बहुत सी लड़कियों की ज़िंदगी बचा ली । फिर कंचन ने डॉक्टर को दिखाना शुरू किया और कुछ सालों बाद कंचन को लड़का हुआ और कंचन और राजेश खुशी-खुशी ज़िंदगी जीने लगे । Ashram Me Rasleela

1 टिप्पणी

  1. […] दोनों के होंठ आपस में मिल जाने को बेताब थे और कपकपा रहे थे कि मनीष ने आगे बढ़कर मनीषा के होठों पर करारा चुंबन दे दिया और मनीषा को बेताब कर दिया और कुछ देर यूं ही दोनों एक दूसरे की जीब से जीब मिलाने लगे और एक दूसरे को कसकर दबोचने लगे । फिर मनीष ने मनीषा को बिस्तर पर डाला और फिर कभी मनीष ऊपर तो कभी मनीषा नीचे । दोनों के बीच एक गरमी सी पैदा हो गई और अब इस गरमी को रोकने का एक ही तरीका था – दोनों का मिलन । Palang Tod Romance […]

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें