Devar bhabhi ki antarvasna

देवर भाभी की वासना Devar bhabhi ki antarvasna

Devar bhabhi ki antarvasna भाभी और देवर का रिश्ता नोकझोंक भरा तो होता ही है साथ में उसमें शर्म और झिझक भी बनी रहती है लेकिन तब क्या हो जब रिश्ते में वासना और हवस का नंगा नाच होने लगे और हवस की आग इतनी बढ़ जाए की भाभी देवर चुदाई पर आ जाएँ । भाभी देवर की ये चुदाई इतनी बढ़ गई कि सारा आगरा इन दोनों की हवस का शिकार हो गया ।

ये कहानी 2019 में आगरा के एक शहर की है जहाँ भाभी देवर के रिश्ते ने वो गुल खिलाया कि जिसने भी इसके बार में सुना दंग रह गया । चौधरी जी की आगरा में पेठों की बहुत दुकानें थी, लगभग पूरे आगरे में उनके पेठे सप्लाई होते थे । पुश्तैनी दुकानदारी होने की वजह से चौधरी जी का कारोबार बहुत बढ़ चुका था और वो वहाँ के बाहुबली हो चुके थे ।

बड़े-बड़े नेताओं के साथ उठना-बैठना उनकी जैसे रोज़ की बात थी । चौधरी जी के दो बेटे थे – रनवीर और अक्षय । रनवीर और अक्षय के बीच सिर्फ 2 साल का फासला था । अब चौधरी साहब ने सोचा कि रनवीर की शादी करवा दी जाए तो शादी के लिए लड़की खोजना शुरु कर दिया ।

खोजते खोजते चौधरी साहब को हरियाणा के एक जाट परिवार से सविता मिल गई ।

सविता दिखने में हुस्न की मल्लिका थी । जाटनी होने की वजह से उसका कद और उसका जिस्म कसा हुआ और सुडोल था । हरियाणा में पली पढ़ी होने की वजह से उसका लड़कों से बहुत ज्यादा संपर्क नहीं हो पाया ।

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फिर भी परिवार का नाम होने की वजह से बातचीत चल पड़ी और रिश्ता घरवालों ने तय कर दिया । शादी हो गयी और शादी की पहली रात रनवीर और सविता दोनों के लिए रंगीन होने वाली थी । क्योंकि रनवीर बेहद शरीफ लड़का था और पढ़ाई पूरी करने के बाद चुपचाप पापा के बिजनेस में लग गया हालांकि अक्षय रंगीन मिजाज था और छोटा होने की वजह से घर का लाडना भी ।

लेकिन घरवालों को क्या पता था कि अक्षय भाभी की चुदाई ही कर देगा और जाटनी की चुदाई होने के बाद वो कहां रुकती है ।

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सुहागरात वाली रात को रनवीर कमरे में आया और सविता से बात करनी शुरु कर दी –

तुम खुश हो ना ?

सविता – हाँ, लेकिन आप चाहो तो और खुश कर सकते हो

कैसे ?

 सविता – आज वो करदो जो मैं कईं सालों से करवना चाहती हूं, मेरी चूत का पानी सालों से किसी के लंड के इंतजार में है, इसे नहला दो, आज मुझे वो मज़ा दे दो जो मैनें कभी पहले महसूस नहीं किया है ।

रनवीर का लंड खड़ा हो गया और उसने फौरन एक-एक करके सविता के कपड़े खोलने शुरू कर दिए । –

सविता ने लहंगा पहना हुआ था, रनवीर ने उसके लहंगे में हाथ दे दिया और चुत तक पहुंचकर उसे सहलाने लगा । चुत सहलाने की वजह से सविता पागल सी हुई जा रही थी, उसकी वासना जैसे चरमसुख तक पहुंच रही थी और रनवीर चाहता भी यही था ।

अचानक सविता की चुत गीली होने लगी तो रनवीर ने चूत को सहलाना बंद कर दिया और ब्लाउज खोल दिया और ब्रा को चूसने लगा । चूसते-चूसते उसने ब्रा खोल दी और अब वह सविता के निप्पल चूसने लगा । निप्पल चूसते-चूसते वह उन्हें काट भी रहा था और सविता की आ….आ…. भी निकल रही थी । लेकिन सविता आज सब कुछ सह जाने के इरादे से तैयार दी ।

आज वो हर दर्द को सह जाने का इरादा करके चुदना चाहती थी । धीरे-धीरे रनवीर ने सविता को पूरा नंगा कर दिया और उसके बाद खुद नंगा हो गया । इसके बाद रनवीर बिस्तर पर लेट गया और सविता से कहा –

आजा, लंड पर बैठ जा और सवारी कर

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सविता – देखना कहीं घोड़ा थक न जाए, ऐसा कहकर सविता लंड पर बैठ गई और पूरी मदहोशी से सवारी करने लगी । तभी रनवीर ने उसे उछालना शुरु कर दिया । आह…..आह…….आई……..आ……..

इन चीखों से सारा कमरा चहकने लगा । लेकिन ऊपर कमरा होने की वजह से आवाज़ ऊपर नहीं आ पाई । लेकिन अगर कमरे के पास से गुज़रो तो सब कुछ साफ साफ सुनाई दे रहा था । अक्षय जो कि छोटा भाई और तबीयत से रंगीन था, वो वहां से गुजरा और उसने चुदते हुए भाभी के मुंह से ये सुन लिया कि – मैं इतनी जल्दी शांत नहीं होने वाली, मेरी चुदाई वो करेगा जो मेरा सारा पानी निकाल दे ।

उसने भाभी की आह…आह… की सारी आवाज़े तसल्ली से सुनी और

वो पहली ही रात भाभी की आवाज़ से मदहोश होने लगा । मदहोशी का आलम ये था कि उससे रहा नहीं गया और वो पीछे के दरवाजे से गया और खिड़की से झांकने लगा । सविता भाभी के चूचे और उनका कसा बदन देखकर उसका पजामा ढीला हो गया और लंड गीला हो गया ।

भाभी जिस जोश के साथ चुद रही थी और खुद चुदाई करवा रही थी वो अक्षय को बहुत पसंद आ रहा था और अब वह न चाहते हुए भी खुद को रोक नहीं पा रहा था । भाभी का बदन उसे बेचैन किए हुए था और अब उसने वो करने की ठानी जो रिश्तों से परे थी ।

चूंकी बड़ा भाई और पापा दुकान चलाते थे और अक्षय घर पर रहता था तो उसने भाभी को यह अहसास कराना शुरु कर दिया कि वह उनकी तरफ आकर्षित हो चुका है और अब वह उनके साथ बिस्तर गरम करना चाहता है । जैसे – भाभी के बाथरुम जाते वक्त उनके सामने से गुज़रना, भाभी को वासना भरी नज़रों से देखना, भाभी की ब्रा और पैंटी को छत पर जाकर छूना और सूँघना ।

कुछ दिनों तक यूं ही चलता रहा, एक दिन भाभी अक्षय को सीड़ियों पर मिली और उसे रोककर कहा – ये सब जो तुम कर रहे हो, ठीक नहीं है । किसी को पता चल गया तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी, ये सब करना बंद करो । अगर चुदाई का शौक है तो बाहर पैसे देकर आग बुझा लो लेकिन ये सब मत करो । मैं सब जानती हूं, बेवकूफ नहीं हूं मैं । Devar bhabhi ki antarvasna

भाभी के बार-बार समझाने पर भी जब अक्षय नहीं माना तो एक दिन भाभी ने गुस्से से कहा – क्या करना चाहते हो ?

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अक्षय ने जवाब दिया – वही जो सुहागरात में करते हैं ( Devar bhabhi ki antarvasna )

भाभी – शरम नहीं आती अपनी भाभी से ये सब बोलते हुए

अक्षय – देखो, मैं आपकी सारी बात सुन चुका हूं, आपने भैय्या से कहा था कि आप आसानी से संतुष्ट होने वाली नहीं है, आपको संतुष्ट करना चाहता हूं बस ।

भाभी ने देवर की ये बात सुनकर उसे तमाचा लगा दिया और खींचकर कमरे में ले गई और कहा – तू शांत कर सकता है मुझे ?

प्यासे देवर ने कहा – बिल्कुल । ऐसा सुनते ही सविता ने कमरे का दरवाजा बंद किया और उसकी पैंट खोल दी । लंड देखकर सविता के होश उड़ गए और वो तिलमिला उठी ।

उसने देवर के लंड को मुंह में लेने में देर नहीं लगाई और वो फौरन उसका लंड चूसने लगी । लंड चूसने के बाद उसे साड़ी उठाई और कहा – चोद मुझे, लेकिन खड़े खड़े चोदना होगा और झटकों के साथ ।

अक्षय ने भाभी की पैंटी ढीली की और चूत में लंड डाल दिया और झटकों के साथ भाभी को उछालने लगा । हर झटका सविता को जैसे किसी अनोखे आनंद की याद दिला रहा था । वो आ………..आह……………करके चीखने लगी ।

बहुत दर्द हो रहा है देवर दी, आराम से करो…लेकिन देवर का रुकने वाला था । वो चोदता गया और सविता की ये चुदाई उसे पूरी तरह संतुष्ट करने के लिए काफी थी । Devar bhabhi ki antarvasna