Dost ki behan ko choda sex story

शीतल दीदी

Dost ki behan ko choda sex story मैं आगरा में रहता हूं और यहीं मेरा बचपन बीता । पापा यहाँ के बिजली विभाग

में कलर्क हैं और माँ हाउसवाइफ है । इकलौता होने की वजह से मम्मी-पापा ने हमेशा मेरी हर इच्छा पूरीकी है और अब

जब मैं बचपन से जवानी की ओर बढ़ रहा था, तब भी माँ बाप मेरी उम्मीदों को पूरा करने में लगे हुए थे ।

आगरा में मेरे बहुत से दोस्त थे लेकिन नंदन मेरा सबसे अच्छा दोस्त था क्योंकि वो बचपन से मेरे साथ था ।

नंदन की एक बड़ी बहन थी – शीतल, जिसे हम दोनों बचपन से ही दीदी कहते थे, हालांकि वो हमसे 4 साल ही

बड़ी थी । मैं और नंदन 19 साल के हुए तो दीदी 23 की हो गई । रिश्ता अलग चीज़ होती है लेकिन अगर

कोई सुंदर हो तो मन में कहीं न कहीं प्रेम (love) और वासना (horny) जन्म  है । शीतल दीदी 23 की होने

पर बेहद खूबसूरत और हसीन हो गई थी ।

बड़ी-बड़ी आँखें, सुर्ख गाल, लाल गुलाब जैसे होंठ और चूचे (BOOBS) जैसे कपड़े फाड़कर बाहर निकल आएंगे ।

यहीं तक होता तो भी चलता लेकिन दीदी की गांड (elder sister ass) किसी मुलायम गद्दे जैसी हो गई थी

और जब वह चलती थी तो उनकी जींस या उनका पजामे में उनकी आकर्षक जांघें और उनकी गांड (ass) की

पूरी शेप दिखती थी जिसे

सोचकर मैं कईं बार मुठ (masturebate) मार चुका था । लेकिन दोस्त की दोस्ती के आगे मजबूर था और यह

भी नहीं पता था

कि अगर मैं कोई रिश्ता कायम करुं तो उसका हाल क्या होगा । मैं अक्सर दीदी को देखना इग्नोर करता था

लेकिन दीदी का जिस्म मुझे अपनी ओर खींच रहा था । मैं दीदी के जिस्म पर पागल हुआ

जा रहा था क्योंकि दीदी 20 साल की उम्र में जोश भरपूर होता है और चूत मारने की ऐसी बेचैनी होती है जो किसी को भी चोद दे

और शीतल दीदी तो हुस्न का ख़जाना थी । शीतल दीदी (sheetal didi) मुझे अक्सर अपने पास बुलाया करती थी, कभी ट्यूशन (tution)

के लिए तो कभी अपने भाई की वजह से लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा बिल्कुल नहीं था कि जिसे वो प्यार

से सहला रही है वो उनके नाम की मुठ्ठी रोज़ मार रहा है ।

अभी तक तो सिर्फ बचपना चल रहा था और वहीं देखा-देखी चल रही थी लेकिन वासना की चिंगारी आग उस

दिन बनी जब मैं नंदन की छत पर था और वहां शीतल दीदी की पैंटी और ब्रा (panty bra) सूख रहे थे । छत

पर उस वक्त

कोई नहीं था और नंदन भी नीचे कोलड्रींक लेने गया हुआ था । मैं चोरी से शीतल दीदी की पैंटी की ओर गया

और उसे सूंघने लगा । पैंटी सूंघते ही मेरे अंदर धधक रही वासना की चिंगारी भड़क उठी और मैं धीरे-धीरे

मदहोश सा हो गया लेकिन मैं ये नहीं जानता था कि दीदी वहाँ आ चुकी थी और सबकुछ देख रही थी । मेरी

तो जैसे हालत ही खराब हो गई । Dost ki behan ko choda sex story

दीदी मुझे न जाने कबसे देखे जा रही थी । अब मैं डर के मारे रोने लगा

तभी कुछ देर के बाद नंदन आया और मैंने उससे अपने आँसू छुपा लिए और फिर थोड़ी देर के बाद मैं नीचे से

घर जाने लगा । चप्पल पहन ही रहा था कि देखा कोई कुछ नहीं बोला । नंदन के पापा, मम्मी और दीदी

नॉर्मल ही थे । मैं समझ गया कि दीदी ने किसी को कुछ नहीं बताया । मैं वहां से चोरों की तरह निकल गया

और फिर कभी नंदन के घर नहीं गया । लगभग 15 दिन के बात नंदन की मम्मी मेरे घर आई और मेरे

घरवालों से बात करने लगी । मैं वहां से निकल रहा था कि नंदन की मम्मी बोल पड़ी – अरे बेटा घर आना

क्यूं छोड़ दिया, आजकल तो बिल्कुल नहीं आता । क्या नंदन से झगड़ा हुआ है ?

मैने कहा नहीं – बस बाहर ही मिल जाता है वो इसलिए । ऐसा कहकर मैं चल दिया लेकिन मेरी ये छुप्पा

छुप्पी ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और मैं नंदन के घर जाने पर मजबूर हो गया । अब होता ये था कि मैं

घर में वो कोना ढूंढता जहाँ दीदी न आ पाए और हमेशा कोई न कोई मौजूद हो । अकेले मैं कहीं नहीं रूकता

था ।

ये बात पिछले बुधवार की है । Dost ki behan ko choda sex story

नंदन का 21वां जन्मदिन था और केक काटने के बाद हम दोनों ऊपर वाले कमरे में थे । नंदन ने चोरी से

बीयर छुपा के रखी थी और और घरवालों को दिखाने के लिए वो ऊपर कोलड्रींक भी ले आया था ताकि घरवालों

को लगे कि ऊपर दोनों कोलड्रींक पी रहे हैं । हम दोनों ने दो बोतल बीयर पी ली । अब ऊपर वाले कमरे में

एक कीचन और कमरा था । नंदन पूरी तरह नशे में था और नशे की वजह से वो पूरी तरह सो चुका था ।

नशा ज्यादा होने की वजह से मैं डर गया कि घर कैसे जाउंगा लेकिन अगले कुछ मिनटों में मेरे साथ वो होना

था जो मेरा सारा नशा उतार देता । मैं किचन में यह सोचकर गया कि अपना मुंह पानी से धो लूंगा जिससे

मेरा नशा थोड़ा उतरेगा । लेकिन जब मैं किचन में गया तो पीछे से अचानक शीतल दीदी आ गई और उन्होनें

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कीचन का दरवाज़ा बंद कर दिया । मुझे इतनी भी होश नहीं थी कि मैं कुछ बोल पाता । दीदी नें अपने

मुलायम और उतावले होठों से मेरे होठों को रगड़ना शुरु कर दिया । मैं चाहकर भी खुद को रोक नहीं पा रहा

था क्योंकि जिसे सोचकर मैं कुछ महिनों से मुठ मार रहा था उसने अपने हाथ से मेरा लंड रगड़ना शुरु कर

दिया था और मेरे हाथ को अपनी चूत में डाल दिया था । अब मैं बेसब्र सा हुआ जा रहा था। दीदी ने मौका

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देखा हुआ था, दीदी ने अपना सूट ऊपर किया और अपना पजामा और पैंटी खोल दी और मेरे लंड को अपनी

चूत में डालकर झटके मरवाने लगी ।

एक एक झटका दीदी की आह…..आह….आई माँ……..निकाल रहा था ।

दीदी जैसे अपनी सालों की प्यास बुझा रही हो । झटकों के साथ दीदी ने बताया कि नंदन को बीयर का

आइडिया मैनें ही दिया था और मैं जानती थी कि तू मुझे चोदने के सपने देख रहा है ,

अभी कैसा लग रहा है तूझे ?

मैनें जवाब दिया – अच्छा लग रहा है बस थोड़ा और मज़ा करदो ।

दीदी ने मेरे मुंह को अपने चूचों के निप्पल में डाल दिया और बोली – जितना चूस सको आज चूस लो, सारा रस

निकाल लो, निकाल सकते हो ?

अब मेरी वासना भी चरमसुख पर थी, मैनें दीदी को दोनों हाथों से उठा लिया और किचन की सेल्फ पर सहारे

के लिए बिठा दिया और गोच्चे पर गोच्चे देने लगा । Dost ki behan ko choda sex story

मैनें पूरी ताकत से झटके देने क्या शुरु किए दीदी की चीखें निकल गई….

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आई मैं मर गई….आ……..आ…….इतना मत चोदो प्लीज़, आह…….आह……………..

लेकिन मैं अब रुकने वाला नहीं था मैनें एक हाथ से दीदी के चूचों (Boobs) को मसलना शुरु कर दिया और दूसरा हाथ 

चूत के ऊपर मसल दिया । दीदी पागल हो गई, दर्द भरी आवाज अचानक मज़े में बदल गई और दीदी बोली –

चोद और जोर से….आज फाड़ दे मेरी चूत को प्लीज…..फाड़ दे…आह…..आ…….आई…………..मज़ा आ गया ।

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थोड़ी ही देर में मेरा झड़ने लगा और दीदी को ये पता चल गया । दीदी बोली – मेरे मुंह पे झाड़ दे । मैनें चूत

से लंड बाहर निकला और मुठ मारना शुरु कर दिया और पच….पच….दीदी के मुंह पर झाड़ दिया । दीदी और

मैं उस दिन चरमसुख की सीमा को पार कर चुके थे ।

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