Dost ki girlfriend chodi

(Dost ki girlfriend chodi) दोस्त के गलफ्रेंड की टेबल पर चुदाई

( कहानी सत्य घटना पर आधारित है )

(Dost ki girlfriend chodi) हवस और वासना के आगे रिश्तों की अहमियत नहीं रहती और अगर कोशिश लड़की की तरफ से हो तो फिर सारे हदें पार हो जाती हैं । पिछले दिनों मैं अपने गांव बरेली गया । मेरे दोस्त के बड़े भाई की शादी थी और जिगरी दोस्त होने की वजह से उसने मुझे बहुत दिल से बुलाया था । मैं उसकी कोई बात टाल नहीं सकता इसलिए मैं अपने घर बरेली एक हफ्ते की ऑफिस से छुट्टी लेकर आ गया । घर पहुंचते ही मैनें दोस्त को फोन करके खबर दी कि मैं आ गया हूं और एक घंटे बाद हम दोनों उसी चौपाल पर मिलेंगे जहां अक्सर मिला करते थे ।

(Dost ki girlfriend chodi) मेरे आने की खबर सुनक मेरा दोस्त सुनील बहुत खुश हो गया ।

हम दोनों ही एक दूसरे से मिलने के लिए बेचैन थे । थोड़ी देर बाद हम दोनों मिले और एक दूसरे को गले से लगा लिया । उसके बाद हम कईं जगहों पर घूमे, बहुत कुछ खाया-पिया और पुरानी यादें ताज़ा की । जब हम घर लौटे तो सुनील ने कहा कि – घर चल, आराम से आज पूरी रात बात करेंगे, घर में शादी का माहौल है और मेरा अकेला मन नहीं लगता । अब तू आ गया है तो जब तक शादी नहीं हो जाती, हम दोनों साथ में वक्त गुज़ारेंगे । मैं भी उसके भाई की शादी में आने के लिए ही यहाँ आया था ।

मैनें घर फोन कर दिया और कह दिया कि मैं सुनील के घर पर ही रात में रूकूंगा । शाम को  सुनील और मैं उसके कमरे में गए, दरवाज़ा बंद किया और दारू की बोतल निकालकर एक दूसरे की तरफ देखकर हंसने लगे । उस दिन शराब की कोई कमी नहीं थी और दोस्ती का खुमार ऐसा था कि हम दोनों ही सबकुछ भूलाकर नशे में मस्त होना चाहते थे ।

हमने दारू की पूरी बोतल खतम कर दी और उसके बाद एक-दूसरे की बातें करने लगे ।

  • सुनील ने कहा – अब बता कोई लड़की-वड़की है या अभी तक हाथ से ही काम चला रहा है ।
  • मैंने उसे सारी कहानी सुना दी कि अभी तक खाता नहीं खुला है और कोई लड़की भी नहीं है ।
  • मैं थोड़ा परेशान था तो सुनील ने कहा – लानत है मुझपर अगर एक महीने के अंदर तेरी किसी से करवाई नहीं तो ।
  • मैनें कहा – जाने दे यार । 
  • ये सुनकर सुनील फिर बोला – नहीं, अब ये मेरी जिम्मेदारी है । चल अभी मस्त होकर मजे करते हैं, तेरा काम कल से शुरु । उसके बाद हम दोनों सो गए ।

अगले दिन सुनील ने सुबह 10 बजते ही अपनी गलफ्रेंड को फोन किया और मिलने के लिए बुलाया । सुनील ने कहा – चल मेरे साथ, आज ही तेरा टांका भिड़ाता हूं । मैं भी लालच में बिना कुछ सोचे-समझे उसके पीछे हो लिया । सुनील और मैं एर रेस्तरां पह पहुंचे जहाँ पहले से उसकी गलफ्रेंड इंतजार कर रही थी ।

उसकी गलफ्रेंड दिखने में कमाल थी ।

मेरी सबसे पहले नज़र उसके चूचों पर पड़ी जो टी-शर्ट के बाहर आम की तरह लटक रहे थे । उसके होंठ लाल और चमड़ी एकदम दूध की तरह सफेद थी । उसे देखते ही मेरा मन उसे चोदने के लिए करने लगा । मेरे मन से एक ही आवाज़ आ रही थी – काश ये मिल जाती तो इसे साथ रखकर रोज़ पेलता । फिर याद आया कि ये तो सुनील की गलफ्रेंड है और सारे अरमान बिखर गए क्योंकि अपने लिए दोस्ती सबसे कीमती है ।

सुनील ने गलफ्रेंड को गले लगाया और

कहा – आभा ये मेरा दोस्त संजय है और संजय ये आभा है – मेरी गलफ्रेंड । यकीन मानो आभा ने मुझे बिल्कुल ऐसे नहीं देखा जैसे हम पहली बार मिल रहे हों, आभा ने मुझसे हाथ मिलाया और हाथ को अपने गरम हाथों से दबा दिया । मैनें आभा की ओर देखा तो उसने अपनी शरारती नज़रों से मुझे देखा लेकिन दोस्ती की खातिर मैनें नज़़रें झुका ली लेकिन मैं इतना समझ रहा था कि सब टाइम पास है, और सुनील और आभा एक दूसरे की ज़रूरत पूरी कर रहे हैं, उनके बीच में प्यार और सीरियस जैसा कुछ नहीं है ।

  • फिर सुनील ने कहा – आभा, आज पहली बार तुझसे मदद मांगने आया हूं और बात मेरे दोस्त की है, इसलिए तूझे मदद करनी पड़ेगी ।
  • आभा – हां, ठीक है लेकिन बात क्या है, ये तो बताओ
  • सुनील – इसको रिलेशन में आना है, लेकिन इसकी कोई लड़की दोस्त नहीं है ।
  • आभा ने चौंकते हुए कहा – क्या, सच में
  • सुनील – हाँ और क्या, तूझे क्या लगा
  • आभा ने मेरी ओर देखा और कहा – इन्हें देखकर लगता तो नहीं कि ये सिंगल है 
  • सुनील – तो मैं क्या झूठ बोलूंगा, अरे बहुत परेशान है यार, ये जल्द से जल्द करा । तेरी कोई मस्त सी दोस्त है जो सिंगल है, उससे करवाना है इसका । 
  • आभा – यार देखना पड़ेगा, पूछना पड़ेगा क्योंकि आजकल मुश्किल है । आजकल लड़कियों के पास बहुत ऑप्शन होते हैं तो मुश्किल है । 
  • सुनील – वो सब मैं नहीं जानता, एक हफ्ते के अंदर ये काम करना है तूझे ।
  • आभा – ठीक है मैं देखती हूं । 

उसके बाद हम सीधे एक बियर बार में गए और दारू पीने लगे ।

दारू पीते-पीते कब रात के 10 बज गए पता ही नहीं चला । बरेली में पिछले दो-तीन सालों में बहुत से बियर बार खुल चुके थे जहाँ बड़ी-बड़ी पार्टी होती थी और पार्टियां देर रात तक चलती थी । दारू के नशे में सुनील और आभा पूरी तरह खो चुके थे और अचानक सुनील उठा और आभा को डांस फ्लोर पर ले गया और उसकी कमर में हाथ डालकर नाचने लगा । नाचने में दोनों इतने मगन हो गए कि जिस्मों की हद भूल गए ।

सुनील आभा को होठों को भी चूस रहा था और उसके चूचों को भी बराबर दबा रहा था और मैं पहली बार ऐसा कुछ अपनी आंखों से देख रहा था । आभा भी नशे में चूर वासना की नदी में डूबती जा रही थी । वो बार-बार सुनील के होठों में खो रही थी और उसे बेतहाशा चूमें जा रह ी थी । उसने सुनील की शर्ट के बटन खोल दिए और उसके सीने को जीब से चाटने लगी और उसकी गर्दन को अपने दांतों से काटने लगी ।

थोड़ी देर बार जब दोनों की गरमी बर्दाश्त के बहार हो गई तो सुनील आभा को पीछे बने कमरे की ओर ले गया ।

मैं वहाँ अकेले बैठा था और मुझे वहाँ का सिस्टम भी नहीं पता था । मुझे लगा वो दोनों निकल रहे हैं तो मैं उनके पीछे-पीछे चला गया । वो दोनों नशे में ऐसे दूत थे कि उन्होंने दरवाज़ा भी बंद नहीं किया और सीधे बाथरूम में चले गए । मैं उनके पीछे-पीछे चल रहा था । अब वो दोनों कमरे के अंदर चले गए, मैनें सुनील को आवाज़ दी – सुनील सुन यार, कहाँ जा रहा है, घर चलना है – सुनील, सुनील सुन यार । लेकिन सुनील ने मेरी आवज़ नहीं सुनी तो मैं सीधे अंदर घुस गया । अंदर पहुंचा तो कमरे में कोई नहीं । मैं थोड़ा घबराया और फिर मुझे लगा कि शायद इस दरवाजे के बाद कोई और दरवाजा भी है जहां ये दोनों चले गए हैं तो मैं वहां से जाने लगा ।

तभी मैने आभा की – आह…..आह…..आ…की आवाज़ सुनी ।

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मैं आवाज़ की ओर बढ़ता गया तो बाथरूम की तरफ जा रहा था । बाथरूम एकदम कांच वाले थे जहाँ से सब कुछ दिखाई देता था । मैंनें देखा सुनील ने आभा की टांग उठाई हुई है और वह उसके चूचों को चूस रहा है और दूसरी तरफ से सहारा लेकर आभा को झटकों के साथ चोद रहा है । आभा की आहें निकल रही है उसके दर्द हो रहा है लेकिन चुदाई का मज़ा वो पूरे शोक से ले रही है । मैनें देखा आभा का बदन बहुत टाइट और गठीला था । उसके चूचे एकदम गोल ओर कसे हुए थे । निप्पल जैसे दबाओ तो दूध निकले । मैनें ऐसे चूचे अच्छी-अच्छी पोर्न फिल्मों में भी नहीं देखे थे ।

(Dost ki girlfriend chodi) मेरा लंड आभा की चुदाई देखकर गरम भी हो चुका था और खड़ा भी हो चुका था ।

आभा की जांघे इतनी सेक्सी मोटी मुलायम और चूत इतनी साफ थी कि मुझे दूर से ही नज़र आ रही थी । आभा ने चूत को पूरी तरह से साफ किया हुआ था । सारे बाल हटाए हुए थे जिस वजह से उसकी गुलाबी चूत एकदम साफ नज़र आ रही थी । मैं लंड पकड़कर हिलाने लगा । मैं ऐसा कुछ पहली बार अपने सामने देख रहा था और ये सब देखकर मेरे अंदर आभा की चुदाई का ख्याल आ चुका था । मैं समझ चुका था कि सुनील भी इसे चुदाई के लिए ही रखता है ।

लेकिन फिर भी मैं सुनील को बिना बताए आभा के करीब नहीं जा सकता था । सुनील ने आभा को उठा लिया और शेल्फ पर बैठा लिया और उसकी चूत में अपनी मुंह डाल दिया और हिलाने लगा । चीब  से चूत का चाटने लगा और फिर से आभा की चीखें निकलने लगी ।

जैसे ही आभा चीखने लगती सुनील फौरन लंड उसकी चूत में डालकर झटके मारने लगता ।

पहले हल्के-हल्के और धीरे-धीरे इतना तेज़ हो जाता कि आभा पूरी हिल जाती और झटकों से मिल रही चोट के दर्द को अपने नीचे वाले होंठ को दांत से दबाकर शांत करती । मैं तो आभा के बाल, उसकी गर्दन, उसके चूचे, उसके निप्पल, उसकी पीठ, उसकी जांघें और टांगें और उसकी गांड का दीवना हो चुका था । मैनें लंड को हिलाना तेज़ कर दिया और थोड़ी ही देर में मेरा लंड से मेरा माल (sperm स्पर्म) पच-पच करके झड़ गया ।

मैं फौरन वहां से निकला और पहली वाली जगह पर जाकर बैठ गया । तकरीबन एक घंंटे बाद दोनों नहा-धोकर वहां पहुंचे और अब दोनों पूरी तरह होश में थे । लेकिन वो दोनों नहीं जानते थे कि मैं दोनों के बीच की वासना पर मुठ्ठ मारकर आ चुका था और अब मुझे हर हाल में आभा की चूत मारनी थी । हम घर आ गए और मैं उस रात सुनील के साथ उसके घर ही चला गया और हम वहीं रुके ।

आभा को हमने उसके घर छोड़ दिया था । 

  • सुबह हुई और हम नींद से जागे तो मैं चाय लेकर सुनील के पास गया और कहा – यार, एक बात बोलूं, तू बुरा मत मानियो ।
  • सुनील – अरे तो जानेमन है, बोल क्या बोलना चाहता है 
  • मैनें कहा – यार मुझे नहीं लगता कि आभा ऐसा कुछ कर पाएगी क्योंकि उसने पहले ही मना कर दिया । 
  • सुनील – अरे सारी लड़कियाँ ऐसा ही कहती हैं । कहती कुछ और हैं और करती कुछ और है । 

अगर लड़की तूझे किसी चीज़ के लिए मना कर रही है तो समझ ले कहीं न कहीं उसकी हां है पर हाँ अगर तू उसे बार-बार परेशान करेगा तो फिर वो तेरे हाथ कभी नहीं आने वाली । कल रात जो मैनें देखा उसके बाद मैं सुनील पर पूरी तरह भरोसा कर सकता था कि ये जो कह रहा है वो सच ही होगा । सुनील ने कहा – देख लड़की को टाइम चाहिए होता है, तो उन्हें टाइम देना चाहिए । हाँ ये बात अलग है कि लड़की की तरफ से पहली पहल हो लेकिन ऐसा बहुत कम होता है । अभी इंतजार कर कुछ न कुछ ज़रूर होगा । (Dost ki girlfriend chodi)  

मैं भी सुनील की बात पर भरोसा करके इंतज़ार करने लगा ।

  • फिर मैनें पूछा – यार ये आभा और तेरा क्या चक्कर है, तुम एक-दूसरे से प्यार करते हो या फिर सब ऐसे ही है ।
  • सुनील ने मेरी तरफ देखा और कहा – अरे अब प्यार-व्यार कुछ नहीं होता, सब एक-दूसरे की ज़रूरतें पूरी करते हैं बस। कुछ सालों बाद ये किसी से शादी कर लेगी और मैं किसी से और अगर रिलेशन तब भी ठीक रहे तो शादी के बाद भी चुदाई चलती रहेगी । लेकिन  अगर प्यार-व्यार का चक्कर रहेगा तो सब बर्बाद है ।
  • मैं मन से खुश हो गया और कहा – हाँ भाई सही है । लेकिन मेरे अंदर जल रही आग अब लपट पकड़ चुकी थी । अगले दिन हम फिर बियर बार गए और फिर खूब नाचे गाए और दारू पी । दारू पीने के बाद अचानक सुनील की तबीयत कुछ बिगड़ गई और हम उसे अस्पताल ले गए ।
  • डॉक्टर ने कहा – परेशान होने की ज़रूरत नहीं , बस इनसे कहो कि शराब बंद कर दे । सुनील को अस्पताल से 2 घंटे में छुट्टी मिल गई लेकिन उसे आराम की ज़रूरत थी तो हम उसे गाड़ी में घर छोड़ने गए और उसे घर छोड़कर अच्छे से बिस्तर पर लेटा दिया ।
  • सुनील ने कहा – सुन, आभा को घर छोड़कर आ जा, रात काफी हो गई है ।
  • मैनें कहा – ठीक है, तू ख्याल रख और आभा को छोड़ने के बाद मैं अपने घर चला जाऊंगा, फिर कल मिलेंगे ओके ।

सुनील ने हाथ हिलाकर जवाब दिया ।

  • उसके बाद मैं कार में वापस गया और आभा को गाड़ी में उसके घर तक छोड़ने के लिए चला।
  • रास्ते में आभा ने पूछा – तुम्हारी सच में कोई गलफ्रेंड नहीं है । 
  • मैनें कहा – अरे नहीं है , लेकिन इसमें इतनी बार पूछने वाली कौन सी बात है । 
  • आभा – यकीन नहीं होता, तुम्हारे जैसा मैच्योर, हॉट और सेक्सी बंदा अभी तक सिंगल कैसे रह गया । किसी की नज़र क्यों नहीं पड़ी । 
  • मैनें भी शरारती अंदाज़ में कहा – क्यों, तुम्हारी नज़र भी तो पड़ी है, लेकिन उससे क्या फर्क पड़ता है । 
  • आभा ने कहा – अच्छा जी, आभा की आंखों में शरारत के साथ चमक पैदा हो गई । तभी आभा का घर आ गया और मैं जाने लगा तो
  • आभा ने कहा – रूको, अब 2 बज गए हैं, यहाँ तक आए हो तो चाय तो पीकर जाओ ।

मैनें मना नहीं किया लेकिन मुझे नहीं पता था कि चाय

मुझे वो सुख देने वाली है जो मैनें आजतक महसूस नहीं किया था । आभा का नशा अभी पूरी तरह उतरा नहीं था और वह ताले में चाबी नहीं डाल पा रही थी । मैनें उसके हाथों को छुआ और उसके हाथों से चाबियां ले ली और फौरन तला खोल दिया । हम अंदर गए ।

  • अंदर जाते ही मैनें कहा – एक ताला तो खुल नहीं रहा, चाय क्या पिलाओगी । आभा ने कहा – नशे में बहुत कुछ पिला सकती हूं मैं, तुम जानते नहीं हो मुझे । 
  • मैनें कहा – बहुत अच्छी तरह जानता हूं ।
  • आभा ने मुझे देखा और कहा – बैठो मैं चाय लाती हूं और वो किचन में चली गई ।
  • थोड़ी देर बाद आभा ने किचन से आवाज़ लगाई – संजय सुनो ज़रा, यहाँ ओओगे ।
  • मैं आवाज़ सुनते ही किचन के अंदर पहुंच गया और कहा – हां बोलो – आभा ने चाय पत्ती का डब्बा ऊपर रखा था और वो उछल-उछलकर उसे लेने की कोशिश कर रही थी ।

मैने ंसोचा – ये तो रोज़ चाय पीती है फिर डब्बा इतनी ऊंचाई पर क्यों रखा और अब उछल-उछलकर मुझे गांड दिखाना चाह रही है ।

मैं समझ गया । मैनें कहा अभी मदद करता हूं और मैं आभा के पीछे लंड रखकर चिपक कर खड़ा हो गया और आभा की गर्दन को चूंबन करने लगा । आभा मेरे इस तरह चूंबन से दीवनी सी हो गई और उसने अपने बालों को हटाकर मुझे पूरी गर्दन दे दी। मैनें भी पूरी गर्दन को अपनी गर्म सांसों से भर दिया और फिर में उसके होठों से लेकर उसकी गर्दन को ऐसे चूसने लगा मानों रसीला आम मिल गया हो । (Dost ki girlfriend chodi)

मैं उसे काट रहा था, चूस रहा था,

अपनी जीब से चाट रहा था । ये मेरे लिए एकदम नया था लेकिन मैं ये बिना किसी झिझकर के कर रहा था । मेरा लंड पूरी तरह गीला हो चुका था । मैनें अपना हाथ आभा की टाइट पैंट के अंदर डाल दिया और उसकी पैंटी के अंदर घुसा दिया और उसकी चूत में ऊंगली करने लगा । आभा की आंखें पूरी तरह खुल गई और वो आह…आह…करने लगी । थोड़ी देर में आभा ने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल दिए और वो मेरे बदन को चूमने लगी । उसकी और मेरी गरम सांसे एक-दूसरे को होने वाली चुदाई का इशारा दे रहे थे । आभा ने मेरे पैंट की चेन खोली और लंड पकड़ लिया और बोली – काफी गरम है और बड़ा भी ।

  • मैनें कहा – चूत तो तुम्हरी भी कोमल है और चिकनी भी । 
  • आभा – मेरी चूत की प्यास बुझा पाओगे 
  • मैनें कहा – पता नहीं लेकिन कोशिश पूरी करूंगा । 

इतना सुनकर आभा  ने अपनी पैंट खोल दी और और मेरे हाथ को अपनी पैंटी के अंदर डलवा दिया और बोली – जितनी रगड़ सकते हो रगड़ो ।

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अगर मैं गरम हो गई तो आज भरकर चुदूंगी तुमसे । लेकिन अगर मैं गरम नहीं हो पाई तो तुम्हें अभी यहां से जाना होगा । मैनें हां कर दी और आभा को सामने रखी एक टेबल पर लेटा दिया और चूत खोल दी और उसपर थूक लगाकर रगड़ने लगा । मैनें कहीं देखा था कि थूक लगाकर अगर चूत रगड़ो तो औरत का पानी बहुत जल्द निकलता है और मैं वही करने लगा । थोड़ी देर में आभा की चूत गीली हो गई और वो पूरी तरह गरम हो गई । 

आभा बोल पड़ी – जल्दी लंड से चोदो मुझे और चोदना पूरी ताकत से ।  (Dost ki girlfriend chodi)

मैनें लंड पर कंडोम चढ़ाया और लंड को गीली हो चूकी चूत में डाल दिया और तेज़-तेज़ पूरी ताकत के साथ चोदने लगा । मैनें दोनों हाथों से आभा के चूचे मसल दिए और जोर-जोर से झटके मारने लगा । आभा को यकीन भी नहीं था कि सीधा सा दिखने वाला मैं उसे चुदाई का दर्द दे रहा था ।

आभा चीखें मारना शुरु हो गई – आह….आह….आ………आ………आ……….उई………अई………….उई ….आ…आ………आ……चोदो…और चोदो……..और तेज़……..और जोर से……..आह…….आ…….रूक जाओ….आ….आ…..लेकिन मैं रूकने का नाम नहीं ले रहा था । मैनें आभा को घोड़ी बना दिया और उसे पूरी ताकत के साथ चोदने लगा । चोदते-चोदते आभा सुनील-सुनील चिल्ला रही थी लेकिन वो ये

अच्छी तरह जानती थी मैं सुनील नहीं हूं । 

मै आभा को चोदता रहा था मैंने लंड की रफ़्तार तेज़ की तभी आभा का बदन कापना शुरू हो गया वह चिलाने लगी चोद चोद मझे ऐसे ही चोद मई अपने लंड से और तेज़ी से अंदर बहार करने लगा की आभा अपने हाथो को पीछे किया मुझे कमर से पकड़ कर बोलने लगी ऐसे ही चोदो मुझे ऐसे बोलते ही आभा की चुत से पानी निकला और कापने लगी और आगे की और गिर गयी .

मैंने भी मौके पर चौका मारा और उसकी गिल्ली चुत में ज़ोर ज़ोर से 6-7 झटके मरे और मेरे लंड से पानी निकल गया और मै आभा के बगल में जा लेटा और हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कारने लगे और किस कर के हमने आगे के लिए वादा करा और कहा इसी तरह एक दूसरे की प्यास बुजाएँगे और आज भी हम एक दूसरे से मिलते है और इस तरह एक दूसरे की प्यास बुजाते है. (Dost ki girlfriend chodi)

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