Ek bangalan ki adhoore pyaas part 8

Ek bangalan ki adhoore pyaas एक बंगालन की अधूरी प्यास हवस की आग आदमी को अंधा बना देती है उसे औरत के जिस्म के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता लेकिन अगर हवस और वासना की ये आग किसी औरत को लग जाए जो वो सारी हदें पार कर देती है । उम्र बढ़ने के साथ-साथ जिस्म की कुछ ज़रूरतें होती हैं जो हर आदमी और औरत को महसूस होती हैं और अगर वो पूरी न हो तो अंदर ही अंदर यह चिंगारी आग बनती रहती है । रातें गरम और बिस्तर नरम होने लगते हैं ।

18 की उम्र एक कच्ची उम्र होती है और 25 तक आते-आते जिस्म की आग धधकता हुआ ज्वालामुखी बन जाता है । आदमी जहाँ लंड की गरमी को शांत करने के लिए मुठ मारता है वहीं औरत तपती हुई चूत की शांत करने के लिए चूत से छेड़छाड़ करती और बेहिसाब पानी बहाती है । लेकिन ये आग ऐसे शांत नहीं होती, जब तक किसी मर्द का लंड उस चूत को झटके दे-देकर फाड़ न दे, चुत को चरमसुख कभी नहीं मिल पाता और एक औरत भट्टी की तरह इस आग में तपती रहती है । 


(Ek bangalan ki adhoore pyaas) श्रेया ने ऑफिस में चुदाई का नंगा नाच करके

अपने घर के पड़ोसी को भी जन्नत दिखा दी थी और अब इतनी चुदाई के बाद वो एक ऐसा मर्द ढूंढ रही थी जिससे वो शादी कर सके । श्रेया ने ऑफिस बदल लिया था और अब वो एक मेडिकल एजेंसी के लिए काम करने लगी थी जिसकी वजह से उसे दिल्ली छोड़नी पड़ी और हैदराबाद आना पड़ा । यहाँ आकर श्रेया को रहने के लिए कमरा किराए पर लेना था और यहाँ किराया महंगा था । तो उसने वहां कुछ जुगाड़ चलाया और फ्लैट शेयरिंग का आइडिया लगाया । पास में ही एक लड़कियों का कॉलेज था जहाँ हर जगह से लड़कियाँ पढ़ने आती थी । श्रेया को एक कानुपर से आई एक लड़की श्रुति मिल गई जो बड़े सपने लेकर हैदराबाद आई थी । छोटे शहर में उसे अपने सपने छोटे लग रहे थे लेकिन श्रुति के अंदर भी बहुत जल्दी तरक्की करने का भूत सवार था । 

श्रेया ने श्रुति के साथ कमरा शेयर कर लिया ।

श्रैया ऑफिस जाती और श्रुति कॉलेज और शाम को दोनों साथ में वक्त गुजारते । धीरे-धीरे श्रुति श्रैया का स्टाइल देखने लगी और उसे श्रेया एक बहुत ही  मस्त लड़की लगी, जो दुनिया में बिना किसी टेंशन के रहती है, पार्टी करती है, मौज-मस्ती करती है और उसके आस-पास लड़कों की लाइन लगी रहती है । श्रुति ने एक दिन श्रेया से कहा, श्रुति – यार, मुझे तेरी लाइफ जीनी है, कितनी कूल है लाइफ तेरी श्रेया – बेटा, इसके लिए जिगरा चाहिए । श्रुति – जी, वो तो है । श्रेया – बॉयफ्रेंड है तेरा ?श्रुति – नहीं, अभी तो नहीं है श्रेया – क्योंश्रुति – बस, मन नहीं करता ।

जैसे ही श्रेया ने यह सुना, फट से बोल पड़ी , अरे रहने दे, ये आग जो हमारे अंदर लगती है न, इसे बुझाने के लंड की चोट ही चाहिए, वरना चूत में ऊंगली करती रह जाएगी । जब तक लंड के झटके न लगें न, चूत शांत नहीं होती । 

ऐसा सुनकर श्रुति को अजीब लगा लेकिन बाद मे्ं उसने सोचा कि बात तो ठीक है । उसके बाद श्रुति कुछ नहीं बोली ।

लेकिन तब तक श्रेया के अंदर कुछ अलग करने का ख्याल आ चुका था और वो जानती थी कि क्योंकि वह लड़की है तो श्रुति को आराम से बस में कर लेगी । 

श्रेया ने पूछा – अच्छा एक बात बता, चूत में ऊंगली करती है

श्रुति – कभी-कभी जब मन करता है 

श्रेया – तूझे तो पता ही नहीं, मज़ा क्या होता है 

श्रुति – ऐसा  है क्या 

श्रेया – अरे वो मज़ा आता है, लगता है अभी-अभी किसी मोटे लंड से चुदाई हुई हो ।

श्रुति  – वो कैसे 

श्रेया – कपड़े उतार और ऐसा कहकर श्रेया ने अपनी टीशर्ट उतार दी और श्रुति के भी उतारने लगी । 

(Ek bangalan ki adhoore pyaas) उसके बाद श्रेया ने अपनी ब्रा का स्ट्रीप खोला और चूचों के निप्पल को जोर से दबाने लगी ।

वो जैसे-जैसे निप्पल दबा रही थी वैसे-वैसे आह…..आह…..करके श्रेया की चीख निकल रही थी और उसे मज़ा आ रहा था । पहले तो श्रुति को ये सब बहुत अजीब लग रहा था लेकिन श्रेया का यह चरमसुख देखकर उसने भी चूचों को दबाना शुरु कर दिया । उसका एक हाथ चूचो को दबा रहा था और दूसरा हाथ पेंटी के अंदर था । आज से पहले उसने कभी ऐसा नहीं किया था । थोड़ी देर बार श्रेया ने श्रुति की ब्रा खोल दी और उसके बाद उसकी पेंटी खोलकर उसे भी अपनी चरमसुख के लिए तैयार कर लिया ।

और फिर श्रेया ने सामने रखे टीवी पर पॉर्न फिल्म लगा दी । दोनों उसे देखते-देखते पूरी तरह वासना की आगोश में चले गए । दोनों की चूत गीली होने लगी और थोड़ी देर बाद चूत से पानी गिरने लगा । श्रुति ने ऐसा सुख पहले कभी महसूस नहीं किया था और यह उसके लिए एकदम नया था । 

ऐसे ही धीरे-धीरे श्रेया रोज़ श्रुति को चरमसुख पाने की नई-नई टेकनिक बताती थी और श्रुति जो अभी तक किसी लंड की चोट से अनजानी थी, उसे ये सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था ।

श्रुति को क्लब ले जाना, लड़कों से मिलाना श्रेया को भी अच्छा लगता था ।

तभी एक दिन श्रेया को ऑफिस  में एक मुस्लिम लड़का मिला जिसका नाम रियाज़ था । कद 6 फुट लंबा, शरीर एकदम कसा हुआ और बेहद शरीफ । श्रेया को रियाज़ पहली नज़र में ही पसंद आया और रियाज़  के सामने श्रेया ने भी बहुत अच्छी होने का ढोंग किया ताकि रियाज़ भी उसे पंसद करने लगे और ऐसा हुआ भी । कुछ मुलाकातों के बाद श्रेया ने रियाज़ के सामने प्रपोजल रखा और रियाज़ ने उसे मान लिया क्योंकि रियाज़ भी कोलकाता से हैदराबाद नौकरी करने आया था और यहां अकेले ही रहता था । उसने सोचा कि कम से कम अनजाने शहर में कोई बंदी होगी तो वक्त अच्छा कटेगा और अकेलापन खत्म हो जाएगा ।

 
दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे और एक दिन श्रेया को मूड बन गया ।

वो रियाज़ के साथ अपने फ्लैट पर आ गई । फ्लैट पर आकर रियाज़ को श्रेया ने श्रुति से मिलाया और श्रुति को कुछ देर के लिए बाहर जाने को बोल दिया । श्रुति समझ गई और शाम को लौटी । रियाज़ और श्रेया ने फ्लैट में जमकर मौज मस्ती की और रियाज़ ने श्रेया को तेल लगाकर चोदा । श्रेया अब रियाज़ के साथ सीरियस थी लेकिन मामला कुछ और ही हो चुका था । दरअसल जब से रियाज़ से श्रुति को देखा था तब से वो उसका दीवना हो गया था ।

ऐसा नहीं था कि उसे श्रेया पसंद नहीं थी लेकिन जब माल बढिया होता है तो किसकी नीयत नही डोलती । रियाज़ ने श्रेया से कहा – यार जब भी करना होगा हम तेरे फ्लैट में ही करेंगे । वहां बहुत मज़ा आता है । इसके अलावा पार्टी भी तेरे ही फ्लैट पर होगी । श्रेया ने हां कर दी लेकिन वो नहीं जानती थी कि रियाज़ ये सब कुछ श्रुति को पाने के लिए कर रहा था । थोड़ा वक्त बीता और रियाज़ का फ्लैट पर आना-जाना चलता था जिसकी वजह से श्रुति भी उसके साथ कम्फर्टेबल हो गई । 

(Ek bangalan ki adhoore pyaas )अब एक दिन रियाज़ श्रेया को बिना बताए उसके फ्लैट पर पहुंच गया हालांकि उसे पता था कि

श्रैया उस दिन फ्लैट पर नहीं होगी ।

श्रुति ने दरवाज़ा खोला तो वो बोली –  श्रेया घर पर नहीं है रियाज़ ।

रियाज़ श्रुति के पास आया और उसे वासना की नज़र से देखने लगा ।

श्रुति ने कहा – क्या हुआ, ऐसे क्यों देख रहे हो ?

रियाज़  आगे बड़ा और उसने श्रुति को दिवार से लगा दिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूसने लगा ।

श्रुति के होठों को अपने होठों से दबाने लगा । मुं………मुं……..मु…..
पूरा कमरा चुंबन की आवाज़ से भर गया था । 

श्रुति – ये गलत है, क्या हुआ तुम्हें रियाज़ – कुछ मत बोलो, जो हो रहा है, होने दो बस

shruti – नहीं, श्रेया मेरी दोस्त है रियाज़ – तुम्हें पता है उसने कितनों के बॉयफ्रेंड छीने हैं , कितनों का रिश्ता तुड़वाया है । 

shuruti श्रुति पहले तो मना करती रही लेकिन श्रेया ने उसे  इतना खोल दिया था कि अगर कोई उसके निप्पल दबा दे तो फिर श्रुति को बस में किया जा सकता है और ऐसा नहीं था कि श्रुति रियाज़ को पसंद नहीं करती थी । रियाज़ एक खूबसूरत नौजवान था जिसपर कोई भी लड़की फ्लैट हो सकती है । श्रुति ने जो हो रहा था चुपचाप होने दिया । रियाज़ ने श्रुति के चूचों को बाहर से ही मुंह लगाकर चूसने शुरु कर दिया । श्रुति की आंखे बंद हो गई,उसे ये एहसास पहले कभी नहीं हुआ था । थोड़ी देर के बाद रियाज़ नीचे बैठा और श्रुति की फ्रोक ऊपर कर दी और उसी पैंटी के बाहर से ही उसकी चूत को मसलने लगा । Ek bangalan ki adhoore pyaas

श्रुति जैसे पागल सी हो गई,

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे । उसे रियाज़ के बालों को जोर से पकड़ लिया और आ…………आ……..चीखने लगी ।रियाज़ ने श्रुति की ब्रा खोल दी और चूचों को चूसने लगा । दूसरी तरह उसने पैंटी खोलकर सीथा अपना लंड श्रुति की चूत में डाल दिया और उसे दीवार सहारे खड़ा कर दिया । रियाज़ श्रुति को नीचे से झटके मार रहा था और उपर से उसके चूचों के निप्पल को काट रहा था, चूस रहा था । आह…….आह………….आ………की आवाज़ श्रुति की पहली चुदाई की गवाही दे रही थी । 

रियाज़ अच्छी तरह जानता था कि अगर आज उसने श्रुति की चूत खोल दी और पानी निकाल दिया तो श्रुति उसे बार-बार चूत देने आएगी और उसकी चूत पर हर बार रियाज़ का लंड ही चोट देगा । रियाज़ ने धीरे-धीरे अपनी जीब निकाली और श्रुति की गीली और गरम चूत पर रख दी और जीभ से सहलाने लगा । श्रुति तो मानों जन्नत की सैर कर रही थी, उसकी अंतरवासना उसे चरमसुख का वो अहसास करवा रही थी जो उसने पहले कभी नहीं किया था । रियाज़ जैसे-जैसे चूत की एक एक परत खोल रहा था श्रुति को लग रहा था जैसे कोई उसके बदन के एक-एक हिस्से को खोल रहा हो ।

रियाज़ ने अपनी जीब से श्रुति की चूत का पानी चाटने लगा ।

(Ek bangalan ki adhoore pyaas) श्रुति ऐसी मस्त हो गई कि उसने अपने दोनों हाथों से अपने चूचों के निप्पल को जोर से दबाना शुरु कर दिया । रियाज़ जानता था कि श्रुति को चुदाई का कोई तजुरबा नहीं है और अगर उसने आज श्रुति को गरम कर दिया तो श्रुति आज उसके लंड की सवारी ज़रुर करेगी । इसलिए वो रूका नहीं और चूत चाटता रहा । श्रुति ने रियाज़ के बाल पकड़ लिए और खींचने लगी क्योंकि अब रियाज़ श्रुति की चूत को चूस रहा था और श्रुति मदहोश होने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकती थी ।

अब धीरे-धीरे रियाज़ ने अपना लंड श्रुति की चूत के अंदर डाला और बहुत हल्के से श्रुति के ऊपर चड़ गया और बहुत धीरे-धीरे चुदाई करने लगा । रियाज़ के गरम लंड की गरमी से श्रुति की चूत वो मज़ा पा रही थी जिसके लिए वो हमेशा तैयार थी ।  धीरे-धीरे चुदाई करने के साथ रियाज़ ने श्रुति के चूचों को दबाना और चूसना शुरु कर दिया । श्रुति अब हर तरफ से मजबूर हो गई थी और मदहोश होने के अलावा उसके पास कोई और दूसरा रास्ता नहीं बचा था । लंड जैसे-जैसे अंदर जा रहा था श्रुति की सारी इच्छाएँ जोर पकड़ रही थी और उसे दर्द का एहसास हो रहा था लेकिन ये दर्द उसके लिए किसी मीठे दर्द की तरह ही था ।