Hot Kahaniya

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शरारती देवर

Hot Kahaniya रिश्ते जब अपनी हदें पार करते हैं तो कोई शर्म और रूकावट उसे रोक नहीं सकती । शीला शादी करके अपने ससुराल आई । वो बहुत खुश और अपने आपको बहुत किस्मत वाला समझ रही थी क्योंकि उसे जयदीप जैसा सीधा और मेहनती पति मिला था ।

जयदीप कार मकैनिक था और आगरा में ही अपनी दुकान थी जिससे वो अच्छा पैसा कमा रहा था । आगे पीछे कोई नहीं थी न सास की झिकझिक ना ससुर का बुढ़ापा, दोनों पहले ही चल बसे थे, बस जयदीप का भाई सुमित, जो अभी इंटर में पढ़ रहा था,

Hot Kahaniya जयदीप उसे खूब पढ़ा रहा था और इसलिए वो बहुत मेहनत करता था ।

घर आते ही जयदीप ने घर की सारी चाबियां शीला के हाथों में दी और कहा – आज से तुम इस घर की लक्ष्मी हो और घर कैसे चलेगा अब इसकी ज़िम्मेदारी तुमपर है तो अपनी ज़िम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाना । 

शीला ने जयदीप को वचन दिया और पति-पत्नी की गृहस्थी चलने लगी । जयदीप काम के सिलसिले में इतना बिजी हो जाता कि उसे नई शादी का ख्याल भी नहीं था, उसे यह अहसास नहीं था कि अभी उसे शीला को घुमाने या कहीं बाहर ले जाना है और एक औरत के शादी के बाद बहुत अरमान होते हैं लेकिन जयदीप बहुत सीधा था, सो वो ये नहीं समझ रहा था ।

लेकिन सुमित नए जमाने का लड़का था और अभी-अभी जवान होना शुरू हुआ था ।

इस उमर में कदम का बहक जाना कोई बड़ी बात नहीं । सुमित को सब नज़र आ रहा था । वो एक तरफ तो शीला को भाभी समझकर उन्हें इज्जत दे रहा था लेकिन दूसरी तरफ वो ये भी समझ रहा था कि भाभी अकेला महसूस कर रही हैं तो वो भाभी के पास वक्त बिताने लगा । 

Hot Kahaniya एक दिन सुमित स्कूल से जल्दी घर आ गया और सीधा पीछे के दरवाज़े से अंदर घुस गया ।

उसे प्यास लगी तो किचन की तरफ गया और उसने जो देखा उसे देखकर उसके अंदर की जवानी उफान मारने लगी । भाभी खीरे और बैंगन के साथ खेल रही थी और पसीना-पसीन हो गई थी, धीमे आवाजे भर रही थी ।बस बहता हुआ पानी था जो बेहिसाब बह रहा था।

भाभी पसीना-पसीना हो रही थी और सुमित का हाथ नीचे जा चुका था

और सुमित न चाहते हुए भी खुद को बेकाबू होने से नहीं रोक पा रहा था । छुप-छुप कर भाभी की रासलीला देख रहा था लेकिन उनके सामने नहीं आ रहा था । भाभी की आहों ने सुमित को बेताब कर दिया था, उसे न दिन में चैन था और न रातों को नींद । सुमित को मदहोशी और जवानी के सांप ने डंक मार दिया था । अब वो भाभी के साथ और ज़्यादा वक्त बिताने लगा ।

बड़े भाई जयदीप को कुछ खबर नहीं थी कि उसके पीछे क्या होने वाला था पर

शीला मजबूर थी क्योंकि 23 साल की बाली उमर में वो जवानी के समुद्र में तैर रही थी और उसकी मस्त जवानी लावे की तरह उफान मार रही थी । अब सुमित जानबूझकर पीछे के दरवाज़े से आने लगा था और कभी-कभी तो भाभी की लीला देखने के लिए वो स्कूल ही नहीं जाता था ।

सिरदर्द का बहाना करता और फिर खिड़की या दरवाज़े से चोरों की तरह भाभी की मस्त जवानी और उसकी बेचैनी के मज़े लूटता ।

धीरे-धीरे भाभी की अदाएं सुमित को मदहोश करने लगी औ सुमित भाभी की रंगरलियों में खो गया और अब वो अपनी खिलती जवानी को भाभी के हवाले करना चाहता था और भाभी का सारा रस खुद पीना चाहता था । वो जान चुका था कि भाभी बहुत रस से भरपूर है और बहुत रसीली है, तभी तो रोज़-रोज़ अपना इतना रस बहा देती हैं । Hot Kahaniya

एक दिन सुमित ने मोबाइल फोन से भाभी और भाभी की फूटती हुई जवानी की कुछ तस्वीरें छुपके से ले लीं और अपने पास रख लीं ।

इसके बाद सुमित भाभी के पास गया और कहा –

  • सुमित – भाभी, देखो मेरे पास क्या है ?
  • भाभी – ऐसा क्या है जो इतना शोर मचा रहा है, दिखा मुझे
  • सुमित – हां, हां देखो, आपको ही तो दिखाना है 

शीला की हालत खराब हो गई और सुमित मोबाइल लेकर भाग गया ।

Hot Kahaniya शीला आवाज़ देती रही – सुमित रुक, यहाँ आ एक मिनट लेकिन सुमित चला गया । शीला सोच रही थी कि ये सब सुमित का बचपना है लेकिन सुमित के इरादे कुछ और ही थे । सुमित चाहता था कि भाभी अपने मुंह से खुद सौदे की बात करे और सौदा क्या होगा ये सुमित को पता था । 

शाम हो गई, सुमित घर नहीं आया ।

बड़े भैय्या 7 बजे तक घर आते थे और सुमित 5 बजे घर आया । जैसे ही सुमित घर आया, शीला उसके पास उसके कमरे में गई और बोली – 

  • भाभी – सुमित शरारत नहीं करते, चलो दो मुझे मोबाइल
  • सुमित – क्यों, मोबाइल क्यों 
  • भाभी – अच्छा वो तस्वीर हटा दे 
  • सुमित – क्यों 
  • भाभी – देख तूझे चॉकलेट पसंद है न, मैं तेरी लिए कल, नहीं कल नहीं आज ही बहुत सारी चॉकलेट लेकर आउंगी । 
  • सुमित अपनी बात पर आ गया और बोला – नहीं, चॉकलेट नहीं चाहिए 
  • भाभी – तो और क्या चाहिए 
  • सुमित – बस वही जो आप चाहती हो, आपके जिस्म की थोड़ी सी तपन और कुछ बूंदों की बरसात ।

शीला सारी बात समझ गई और सुमित के इरादे भी समझ गई और बोली – मैं तो तुम्हें छोटा समझ रही थी लेकिन तुम तो बहुत ऊंचे खिलाड़ी निकले ।

Hot Kahaniya शरम है या वो भी बेच के खा गए ।

  • सुमित – फालतू बातों के लिए मेरे पास वक्त नहीं, हाँ या ना बोलो 
  • शीला – देखो देवर जी, ज़िंद नहीं करते, आप इन फोटो का क्या करोगे ।
  • सुमित – भाभी ये तो मेरी रातों का ज़रिया है, हर रात सुहागरात हो रही है सिर्फ इस फोटो की वजह से ।
  • भाभी – वो कैसे ?
  • सुमित – इन्ही फोटो को देखकर मैं अपनी रातें रंगीन हो रही हैं और सच बताऊं तो मुझे आपकी भड़कती और दहकती हुई जवानी ने मदहोश कर दिया है ।
  • मैं भी आपकी जवानी के समुद्र से बूदें लेना चाहता हूं । 
  • भाभी – सच, देवर जी, मैं तुम्हें इतनी पसंद हूं 
  • सुमित – अरे भाभी, अगर मेरा बस चले तो मैं तुम्हें जन्नत की सैर करवा दूं ।
  • भाभी की आंखों में चमक आ गई और वो सुमित से बोली – करवा दो फिर, मैं तो सवारी करने के लिए कब से बेताब हूं लेकिन तुम्हारे भैय्या मुझे सवारी करवाते ही नहीं हैं ।
  • सुमित – लेकिन अगर भैय्या को पता चल गया तो, नहीं-नहीं हम ये नहीं कर सकते, ये सब गलत है ।
  • भाभी – कुछ गलत नहीं है, तुम वो लो जो तुम्हें चाहिए और मैं वो लूंगी जिसके लिए मैं तड़प रही हूं । घर की बात घर में ही रह जाएगी और किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी ।

इससे बाद कि सुमित कोई अगर-मगर बीच में,

शीला ने सुमित को पकड़ा और अपने अंदर समेट लिया और अपने बदन की खुशबू महसूस करवाने लगी । शीला की धड़कने तेज़ थी और सुमित उन्हें सुन रहा था । इसके अलावा सुमित के अंदर  वो सभी भावनाएँ जाग चुकी थी जो सुमित शीला भाभी के लिए हर रात महसूस कर रहा था । सुमित के रोंगटे खड़े हो गए थे ।

वो जिस्म की इस बेताब गरमी को सहन नहीं कर पा रहा था ।

वो चिपट गया और दोनों ने खुद को एक दूसरे की आगोश में ले लिया और उसके बाद शुरू हुआ जवानी और बेताबी के बीच मिलन । सुमित और शीला के बीच अब न तो रिश्तों की दीवार थी औ न ही उम्र की रुकावट । वो दोनों एक दूसरे में पूरी तरह खो चुके थे और अब धीरे-धीरे सारी हदें पार कर रहे थे ।

दोनों की आंखों में बेचैनी और जवानी की चिंगारी भड़क चुकी थी ।

दोनों ने एक दूसरे को कस के जकड़ लिया और एक दूसरे पर हावी होने लगे । कभी सुमित हावी हो जाता तो कभी शीला । दोनों के बीच ये गरमी इतनी जल्दी ठंडी होने वाली नहीं थी । प्यास की नदी बहना शुरू हो गई थी और अब दोनों अपने-अपने तरीके से एक दूसरे को मदहोश करने में लगे हुए थे ।

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थोड़ी ही देर बाद वो वक्त भी आ गया जब दोनों उस सीमा में पहुंच गए

जहाँ आने के लिए दोनों मचल रहे थे । सुमित ने नैना को संभाला और नैना ने सुमित को जकड़ लिया और नैना जन्नत की सवारी करने लगी । वो अब इस सवारी का पूरा आनंद लिए बिना उतरना नहीं चाहती थी । उसकी से बरसों की तमन्ना थी जो आप पूरी हो रही थी ।

थोड़ी देर बार दोनों एक दूसरे को आंखों और इशारों से समझाते हुए उठे और एक दूसरे को इस मिलने के लिए थैंक यू कहा । उसके बाद शीला भाभी को देवर सुमित की आदत लग गई और सुमित भी बचपन की आड़ में शरारती देवर बन चुका था और एक नया रिश्ता जयदीप के पीछे बन गया था । Hot Kahaniya

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