krishna leela

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krishna leela राधे-राधे मित्रों,कृष्ण लीला के कईं रूप हैं, उसी में से एक प्रसंग आज हम यहां भक्तों के लिए लाए हैं ।

जरासंध वध krishna leela

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जरासंध का अर्थ होता है – जो मृत्यु से जुड़ा हुआ है अर्थात काल भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता । मगध के राजा की दो रानियां थी, परंतु दोनों से पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई, कईं वर्षों तक प्रयास करने और हर वैद्य को दिखाने के बाद भी संतान प्राप्ति नहीं हुई । एक दिन राजा को पता चला कि दूर वन में एक महान संत आए हैं, यदि उनसे अर्चना की जाए तो संतान प्राप्ति अवश्य होगी । मगध के राजा वन में भटकने लगे और अंत में उन्हें संत दिखाई दिए । राजा संत के पांव में गिर गए और गिड़गिड़ाने लगे । संत को दया आ गई और उन्होंने मंत्र का उच्चारण शुरू किया । मंत्र के खत्म होते ही एक आम संत के हाथ में प्रकट हुआ । संत ने कहा – हे राजन, ये आम अपनी रानी को खिला देना, संतान की प्राप्ति अवश्य होगी । 

राजा ने संत को प्रणाम किया और दौड़े-दौड़े महल की और भागे ।

krishna leela राजा जब महल पहुंचे तो उन्होंने उस आम के दो हिस्से कर दिए और दोनों रानियों को खिला दिया । ठीक 9 महिने बाद दोनों रानियां गर्भ से हुईं परंतु जब बच्चों का जन्म हुआ तो सब डर गए । दोनों रानियों ने आधे-आधे बच्चों को जन्म दिया । जब आम एक है तो बच्चे दो कैसे होते । महल में फिर शोक छा गया, रानियों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया । राजा की सारी इच्छाएं मर गईं और राजा मायूस हो गया ।

राजा ने आदेश दिया कि बच्चे को जंगल में फेंक आओ । सैनिक आधे-आधे बच्चे लेकर जंगल की ओर गए और बच्चों को फेंक दिया । थोड़ी देर में वहां से जरा नाम की एक राक्षसी गुज़री । उसने देखा बच्चों के दो टुकड़े पड़े हैं, उसके अंदर भूख तीव्र हो गई और उसने दोनों आधे-आधे बच्चों को खाने के लिए उठा लिया ।

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जैसे ही जरा राक्षसी ने बच्चों के दोनों टुकड़े हाथ में लिए,

वो अचानक जुड़ गए और बच्चा रोने लगा । जैसे ही राक्षसी ने उसे खाना चाहा, बच्चे ने अंगूठा मुंह में रखकर गर्जना की । वो गर्जना इतनी भयंकर थी कि राक्षसी वहाँ से फौरन अपनी जान बचाकर भागी । जब ये खबर महल पहुंची तो रानी की ममता जाग उठी और सैनिकों को बोलकर बच्चे को फौरन महल ले आए । krishna leela

krishna leela जरासंध दो नहीं एक है, और एक होक भी दो है ।

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जरासंध ने अमर होने के लिए 100 राजाओं को बंदी बना लिया और उनकी बलि देने को तैयार हो गया । भगवान श्रीकृष्ण भीम और अर्जुन के साथ जरासंध के पास पहुंचे और उसे द्वंद युद्ध के लिए उकसाया । जरासंध मान गया और भीम और जरासंध के बीच भयंकर युद्ध हुआ । कृष्ण सब जानते थे इसलिए उन्होंने भीम को कहा कि जरासंध को मारने के लिए उसके शरीर को बीचों बीच चीरना और अलग-अलग दिशा में फेंकना । भीम ने वैसा ही किया और अंत में जरासंध वध पूर्ण हुआ । 

प्रेम से बोलो राधे-राधे ।

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