Kyu Behak Gayi Sunita

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Kyu Behak Gayi Sunita
Kyu Behak Gayi Sunita

Kyu Behak Gayi Sunita बहक गई सुनीता 10वीं कक्षा पास करते ही सुनीता को कानपुर सिटी उसके मामा के घर भेज दिया गया । यहाँ उसका दाखिला अच्छे स्कूल में हुआ । अभी तक सुनीता लड़कियों के स्कूल में पढ़ रही थी लेकिन कानपुर का ये स्कूल लड़के और लड़कियों के लिए जाना जाता था । यहाँ पढ़ाई काफी बेहतर होती थी । सुनीता अपनी जवानी में कदम रख चुकी थी और अब उसकी भटकने की उम्र आ चुकी थी । जवानी की हवा उसे कभी भी उड़ा ले जाने को तैयार थी ।

Kyu Behak Gayi Sunita सुनीता ने जैसे ही पहले दिन स्कूल ज्वाइन किया वो बहुत घबरा गई और चुपचाप जाकर क्लास में बैठ गई ।

स्कूल में लड़कियों से ज़्यादा लड़के थे और वो भी एक से बढ़कर एक । सुनिता न चाहते हुए भी उनकी तरफ आकर्षित हो रही थी लेकिन देखने वाली बात यह है कि उसे लड़कों से बात करना नहीं आ रहा था । एक दिन सुनिता जब बाथरूम में गई तो उसने पाया कि उसका अंडरवियर गिला हो चुका है और उसके बाद तो उसका अंडरवियर गीला ही रहने लगा ।

सुनिता दिन-रात बस लड़कों के बारे में ही सोचती रहती थी,

कभी कोई लड़का उसके जिस्म को सहला रहा है तो कभी कोई उसे दर्द दे रहा है और सुनिता उसी दर्द का अहसास करके गीली हो रही थी । सुनिता चाहकर भी अपना पानी नहीं रोक पा रही थी, सुनीता की हर रात सुहागरात जैसी बीत रही थी,

बस यहाँ वो अकेली थी, उसे किसी पार्टनर की तलाश थी जिसके साथ वो सारे काम वो कर सके जिसके सपने उसने देखें हैं । सुनिता कली से फूल बनने को पूरी तरह तैयार थी बस उसे एक कबिल माली चाहिए था जो अच्छी तरह खुदाई करे और बीज डाले ।

Kyu Behak Gayi Sunita दिन बीतते गए और दिनों के साथ सुनीता की जिस्म की आग भी चिंगारी से ज्वाला बन चुकी थी लेकिन

वो आज भी स्कूल के सबसे हैंडसम लड़के से ही अपने प्यास बुझाना चाहती थी लेकिन वो जिस लड़के को चाहती थी वो किसी के प्यार में पहले से ही गिरफ्तार था और इसीलिए सुनीता अब तक उसपर किसी तरह का कोई जादू चला नहीं पाई थी ।

सुनिता अपनी उंगलियों के सहारे से ही अपना पानी बहा रही थी और अपनी गरमी किसी तरह मिटा रही थी लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलता । सुनीता दिनों दिन गरम होती जा रही थी, उसके जिस्म की तपन उसे मदहोश कर रही थी और वो अब वो उस भावना को महसूस करना चाहती थी जो हर औरत के लिए ज़रूरी होता है लेकिन क्या सुनीता सही कर रही थी, क्योंकि इस उम्र में अक्ल थोड़ी कच्ची होती है, कहीं कुछ गलती हो गई तो सुनीता पेट से न हो जाए ।

लेकिन सुनीता को इतना सब सोचने की परवाह नहीं थी और न ही उसे इन सबमें कोई इंट्रस्ट था,

वो तो बस अपनी गुफा के लिए किसी यात्री को ढूंढ रही थी जो उसके गुफा का दरवाज़ा खोल दे और गुफा के अंदर जो भी रस है, उसे निचोड़ ले और पी जाए । वो हर रात आग की भट्टी की तरह तप रही थी लेकिन उसकी मजबूरी थी कि वो जिस लड़के से साथ जिस्म की गरमी बुझाना चाहती थी वो उसे घास नहीं डालता था ।

सुनीता ने फेसबुक, इंस्टाग्राम हर जगह उसे रिझाने की कोशिश की,

कभी शरारती बातों से तो कभी अपनी बोल्ड और हॉट फोटो पोज़ से, लेकिन वो किसी के सच्चे प्यार में गिरफ्तार था और किसी और की तरफ नहीं देखता था । तभी स्कूल में अंग्रेज़ी की टीचर का एक्सीडेंट हो गया और वो बुरी तरह घायल हो गई । अब स्कूल में हफ्ता भर हो गया था, लेकिन अंग्रेज़ी की क्लास नहीं हुई । अंग्रेजी की क्लास में सब मज़े करते, एक-दूसरे से बातें करते और खूब मस्ती करते ।

तभी एक दिन क्लास में एक जवान लड़के की एंट्री होती है जो उम्र में बस 23 साल का है और इसी स्कूल से पास होकर वो गया है ।

वो अपने समय में अंग्रेज़ी का सबसे बेहतर बच्चा था और हमेशा सबसे ज़्यादा नंबर लाता था । उसका नाम पीयूष था और वो शर्ट-पैंट में क्लास में दाखिल हुआ । उसके एक हाथ में रजिस्टर था और दूसरे में डस्टर । सब उसे देखकर चुप हो गए और पीयूष ने कहा – हैलो क्लास, मेरा नाम पीयूष है, मैं अगले तीन महीने के लिए आपको अग्रेज़ी पढ़ाने आया हूं और ये उम्मीद करता हूं कि आप मेरा साथ देंगे । क्लास के सब लड़के पीयूष को टेड़ी नज़र से देख रहे थे जबकि लड़कियों के मुंह से आह….निकल रही थी ।

अब रोज़ाना पीयूष क्लास में आता और अंग्रेज़ी की क्लास लेता लेकिन सुनीता की आंख में बस चुका था और सुनीता उसी को सोच-सोचकर अपनी रातें गीली करने लगी थी ।

न चाहते हुए भी सुनीता ये मानने को तैयार नहीं थी कि पीयूष उसका टीचर है और उसे तो बस पीयूष के साथ वो सब करना था जो वो सपने में बिस्तर पर उसके साथ पहले हो कर चुकी है । उसे पीयूष से नज़दिकीयां बढ़ानी शुरू कर दीं और पीयूष को किसी न किसी बहाने से इशारा देने लगी कि वो क्या चाहती है । पहले तो पीयूष को ये सब बचपना लगा लेकिन जब सुनीता ने पीयूष को अपनी एक वीडियो शेयर की तो पीयूष का मन मचल गया और पीयूष सुनीता की जवानी और उसके आकर्षक जिस्म की और खिंचता चला गया ।

Kyu Behak Gayi Sunita पीयूष ने सुनीता को एक पता भेजा और कहा कि 1 बजे इस पते पर पहुंचो ।

सुनीता पते पर पहुंची तो देखा कि पीयूष वहाँ था और शराब के दो पैग लगा चुका था । सुनीता समझ गई कि आज वो अपनी उस ख्वाहिश को पूरा कर लेगी जो वो पिछले कईं महिनों से पूरा करना चाहती है और पीयूष आज उसके साथ वो सब करेगा जिसके लिए उसकी जवानी तड़प रही है । पीयूष आहिस्ता आहिस्ता सुनीता के पास आया और सुनीता इश्क की मदहोशी में खोने लगी । अब पीयूष और सुनीता एक दूसरे को बाहों में लेकर गरमाहट और मोहब्बत दोनों महसूस कर रहे थे । धीरे-धीरे सारी सीमाएँ टूटने लगी थीं और दोनों मस्त होने लगे थे । 

Kyu Behak Gayi Sunita

दोनों इन सबको खुद अलग कर चुके थे और एक दूसरे की गर्म सांसों और जिस्म की गरमी को महसूस कर रहे थे ।

पीयूष को अंदज़ा भी नहीं था कि उसकी ज़िंदगी में ऐसा भी कोई हसीन पल आएगा और सुनीता तो आज कली से फूल होने जा रही थी ।

सांसों का उतावलापन बढ़ने लगा, धड़कने तेज़ होने लगी और धड़कनों के साथ जवानी परवान चढ़ने लगी और जवानी दोनों पर पूरी तरह हावी हो गई थी।

दोनों का पानी निकलना शुरू हो चुका था और दोनों अब उस सीमा पर पहुंच गए थे जहाँ से वो खाली हाथ नहीं आ सकते थे ।

पीयूष ने सुनीता को अपने ऊपर हावी कर लिया और सुनिता किसी झूले की तरह पीयूष के ऊपर झूल रही थी,

एकदम मदहोश और दिवानी पीयूष ने अपना काम कर दिया था, सुनीता अब उसे दिलों जान से जकड़े हुए थी इसलिए सुनीता को पीयूष ने खुद पर पूरी आजादी दे दी थी । सुनीता का ये पहली बार था इसलिए वो पूरा मज़ा ले रही थी

आज इस सवारी को महसूस कर रही थी और वो आज इससे उतरने वाली नहीं थी लेकिन अभी पीयूष का ऊपर आकर हावी होना भी ज़रुरी था ।

पीयूष ने इशारा किया, सुनीता ने शरारत भरी हंसी ने सुनीता की आंखों में शरारत उतर आई थी और अब वो पीयूष को भी उन आंखों का इशारा दे चुकी थी, पीयूष अब सुनीता का पूरी तरह दीवाना हो गया था और सुनीता को जी भरकर संतुष्ट कर रहा था ।

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