Mastram kahani

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मोबाइल और संगीता का अकेलापन

Mastram kahani संगीता उम्र के 25 साल पूरे कर चुकी थी लेकिन आज तक किसी लड़के के संपर्क में नहीं आई थी । ऐसा नहीं था कि जवानी की हवा उसे छूकर नहीं गुज़री लेकिन वो हमेशा से प्यार के पक्ष में थी और प्यार करने वाले लड़के के साथ ही अपनी जवानी खर्च करना चाहती थी लेकिन आज की दुनिया में उसे जवानी से खेलने वाले तो बहुत मिलते थे लेकिन प्यार और सहारा देने वाला लड़का कहीं नज़र नहीं आ रहा था ।

Mastram kahani संगीता के माँ-बाप के पास लड़कों के रिश्ते आ रहे थे

लेकिन संगीता प्रेम करना चाहती थी वो उस अहसास को महसूस करना चाहती थी जो उसे अभी तक महसूस नहीं हुआ था । वो भी घंटों महबूब की बाहों का आनंद लेना चाहती थी । वो चाहती थी कि उसे भी कोई दिल से पुकारे, कोई कसकर बाहों में भर ले । अभी वो शादी के लिए कतई तैयार नहीं थी । संगीता की सभी सहेलियों के बॉयफ्रेंड थे जो उनके साथ जवानी में किए जाने वाले सभी काम करते थे ।

संगीता कभी उनको एक-दूसरे को चूमते हुए

देखती थी तो कभी बाहों में बाहें डाले तो कभी कमरे में जाकर बंद होने पर । संगीता उस लड़के की तलाश में थी जिसपर वो अपनी जवानी लुटा दे और जो खुद को भूलकर उसे बेइंतहा प्यार करे । उसे संभाले, उसे पहचाने, उसे समझे लेकिन ऐसा लड़का आज की दुनिया में मिलना मुश्किल था । 

Mastram kahani एक दिन संगीता बाहर से घर आई और बिस्तर पर लेटकर फेसबुक देखने लगी ।

उसने देखा उसे विशाल नाम के एक लड़के ने रिक्वेस्ट भेजी है । वो उसकी प्रोफाइल में गई तो देखा विशाल एक अमीर लड़का है और कईं बड़ी-बड़ी जगहों पर उसका आना जाना है । संगीता समझी की शायद गलती से रिक्वेस्ट आई है तो उसने इसे हटा दिया ।

लेकिन कुछ दिनों बाद जब वही रिक्वेस्ट दोबारा आई

तो संगीता ने उसे अपना लिया और देखा कि विशाल ने उसे मैसेज भेजा हुआ है और लिखा है – हाय, मेरा नाम विशाल है, मैं आपके बारे में जानना चाहता हूं, क्या आप मुझसे दोस्ती करेगी ?

  • संगीता ने बहुत सोचा और फिर मैसेज किया – जी, बोलो ।
  • थोड़ी देर बार विशाल ऑनलाइन आ गया और उसने कहा – दरअसल बात ये है कि मैनें आपको अपनी दोस्त के साथ देखा था, आपने गौर नहीं किया लेकिन आप बहुत सुंदर हो । 
  • संगीता – थैंक यू लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा जबकि संगीता समझ रही थी कि विशाल के इरादे क्या थे और वो संगीता से बातचीत क्यों बढ़ा रहा था ।
  • विशाल – कहीं मिलकर बात करें, प्लीज़

न जाने क्यों लेकिन संगीता ने हाँ कर दी । 

थोड़ी देर बार रात को तकरीबन 9 बजे विशाल का मैसेज फिर आया और उसने संगीता को मिलने की जगह और वक्त बता दिया । 

अब संगीता न नहीं कर सकती थी, क्योंकि जो अब मना करती तो उसी पर सवाल खड़े हो जाते और सच तो यह था कि संगीता बड़े अरसे से किसी मर्द का इंतज़ार तो कर ही रही थी क्या पता विशाल वो मर्द हो जो संगीता का दिल जीत ले ।

अगले दिन दोनों ठीक वक्त पर मिलने वाली जगह पहुंचे और दोनों ने एक दूसरे को हाय कहा और फिर दोनों एक शांत जगह बैठ गए । 

  • विशाल – थैंक यू कि तुम यहाँ आई और मुझे वक्त दिया
  • संगीता – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, तुम बताओ
  • विशाल – देखो, हमारी आज पहली मुलाकात है तो मैं कुछ भी झूठ नहीं बोलूंगा । मैनें तुम्हें मेरी दोस्त रश्मी के साथ देखा था वो शायद तुम्हारी भी दोस्त है ।
  • संगीता – हाँ, काफी पुरानी ।
  • विशाल – जी, और तुम्हें यकीन मानों मैंने जबसे तुम्हें देखा है मैं रातों को सोया नहीं हूं । जागते हुए तुम्हारा ही चेहरा आंखों के सामने रहता है और नींद तो अब मुझे आती ही नहीं, मुझे शायद तुमसे प्यार हो गया है ।

Mastram kahani संगीता की तो जैसे खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।

वो जैसा चाहती थी वैसा ही हो रहा था । विशाल एक सुंदर और रहीस नौजवान था और संगीता से प्यार भी बहुत करता था और संगीता की सारी परेशानी उसने ये बोलकर दूर कर दी कि वो उससे बहुत प्यार करता है ।

  • संगीता – अरे, ऐसे कैसे, आज पहली बार हम मिल रहे हैं, बिना मिले प्यार कैसे हो गया हालांकि संगीता यही चाहती थी कि विशाल उससे चिपट जाए और उसे अपनी बाहों में भर ले । लेकिन वो सब पर काबू किए हुए थी ।
  • थोड़ी देर बार करने के बाद विशाल ने संगीता से कहा – कि कहें चलें कुछ खाने के लिए ।
  • संगीता – हाँ चलो ।

दोनों ने एक रेस्तरां मे खाना खाया और उसके बाद विशाल संगीता को छोड़ने उसके साथ गया ।

आखिर में दोनों ने एक दूसरे को हाथ हिलाकर बाय-बाय किया लेकिन संगीता के लिए ये उस सपने के पूरे होने जैसा था जिसे वो कईं सालों से पूरा करना चाहती थी । लेकिन आगे जो होने वाला था संगीता को उसकी ज़रा भी भनक नहीं थी ।

दरअसल विशाल अमीर और खूबसूरत होने के साथ-साथ

औरतों के साथ खेलने वाला एक खिलाड़ी था और जब रश्मी और विशाल की बात हुई तो रश्मी ने विशाल से शर्त लगाई कि उसकी एक दोस्त है जिसका नाम संगीता है और अगर विशाल ने उसे बस में कर लिया तो रश्मी विशाल को पूरे 5 हजार रूपए देगी और अगर विशाल हारा तो वो रश्मी को 5 हजार देगा । लेकिन संगीता तो प्यार की भूखी थी, वो तो खुद के लिए एक ऐसा हमसफर खोज रही थी जो उसे बस प्यार दे और बस प्यार दे । Mastram kahani 

उसे खबर भी नहीं थी कि वो बस एक शर्त का हिस्सा है ।

धीरे-धीरे विशाल संगीता के नज़दीक आता गया और दोनों के बीच दूरीयां कम होती गईं । विशाल ने संगीता के दिल में जगह बना ली और संगीता को प्यार करने लगा । अब प्यार धीरे-धीरे संगीता के होठों को छू रहा था, उसके गालों को महसूस कर रहा था और उसको बेकाबू करता जा रहा था । विशाल संगीता को किसी न किसी बहाने से छू ही लेता था और अगली बार मिलने के लिए एक पुरानी याद के तौर पर उसे कुछ न कुछ ज़रूर देता ।

Mastram kahani एक दिन विशाल अपनी गाड़ी लेकर आया और उसने संगीता को कहा कि आज हम लॉंग ड्र्राइव पर जा रहे हैं ।

संगीता पहले से तैयार थी और दोनों निकल पड़े । जब दोनों आधे रास्ते पहुंचे तो बहुत तेज़ बारिश होने लगी और गाड़ी वहीं रोकनी पड़ी । वहाँ एक छोटा सा बाज़ार और उसके बीच एक शानदार होटल था । विशाल और संगीता गाड़ी में एक दूसरे का हाथ पकड़कर बैठे रहे और एक दूसरे की आंखों में आंखें डालकर देखते रहे । न जाने संगीता को अचानक क्या हुआ वो गाड़ी की सीठ से उठी और विशाल के पास जाकर बैठ गई और विशाल को अपनी आगोश में ले लिया ।

वो विशाल को इस तरह गले लगा रही थी मानों कईं सालों की प्यासी हो ।

वो विशाल के बदन की खूशबू महसूस कर रही थी और उसे बेपनाह प्यार कर रही थी । कुछ देर तो विशाल खामोश रहा लेकिन उसे बाद विशाल ने धीरे-धीरे संगीता को प्यार की निशानी देना शुरू कर दिया । कुछ निशानियाँ होठों, कुछ गले, कुछ कंधे और कुछ कंधे से नीचे जाकर । गाड़ी के अंदर गर्मी से फैल गई । आह…आह….की आवाज़ से गाड़ी गूंजने लगी लेकिन सुनसान रास्ते और बारिश में वो सांसे घुल गईं और एक दूसरे को बेपनाह मोहब्बत करने का सिलसिला जारी रहा ।

दोनों एक दूसरे पर हावी हो रहे थे,

कभी विशाल संगीता को कस रहा था और कभी संगीता विशाल को नरम कर रही थी । दोनों के बीच आहों की रस्साकस्सी चलना शुरू हो गई थी । अब दोनों सारी सीमाएं पार करने वाले थे क्योंकि एक दूसरे की बदन की खूशबू दोनों की रास आ गई थी और अब दोनों उस मुकाम पर पहुंच गए थे जहाँ से वापस आना या रुकना नामुमकिन था । अब तो बांध टूटना तय था, अंदर पड़े हुए झाग का बाहर आना बाकि था, बोतल हिलाई जा रही थी और गुफा पूरी तरह गीली हो चुकी थी । बोतल अंदर बाहर हो रही थी और झाग किसी भी वक्त निकल सकता था तभी पच…पच की आवाज़ आई और संगीता ने राहत की सांस ली । Mastram kahani

उसके कुछ समय बाद दोनों ने कपड़े पहने और दोनों पास वाले होटल में चले गए ।

वहाँ उन्होंन दो रातें बिताई लेकिन बिना कमरे से बाहर आए । दोनों के बीच जो पनप रहा था वो प्यार नहीं था सिर्फ जिस्म की भूख थी और संगीता को तब अहसास हुआ कि वो असल में अपने लिए कोई साथी नहीं बल्कि अपनी दबाई हुई जिस्म की भूख को पूरा करने के लिए एक मर्द खोज रही थी । 

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