Mastram Ki Kahani

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ससुराल की खुशी

Mastram Ki Kahani मधु की शादी हुए अभी महिना भी नहीं बिता था कि मधु चौथी बार माइके आ गई थी । आस-पड़ोस वालों ने काना-फूसी करना शुरू कर दिया था कि मधु की अपने ससुराल में नहीं बनती, कोई तो यह भी कह रहा था कि मधु के पति ने उसे घर से निकाल दिया है और कोई ये कह रहा था कि मधु को घर-गृहस्थी चलानी नहीं आती ।

Mastram Ki Kahani ये सवाल दिनभर मधु के सामने आकर खड़े हो जाते थे

लेकिन मधु अब ससुराल जाने से डर रही थी और वजह थी उसके पति का बरताव । मधु आज चौथी बार ससुराल आई तो घरवाले चिंता में थे लेकिन मधु ने कहा कि वो सिर्फ अपनी माँ से ही बात करेगी ।

  •   माँ ने पूछा – क्या हुआ मधु, सब ठीक तो है न ?
  • मधु – नहीं माँ, वहाँ कुछ भी ठीक नहीं है ।
  • माँ – क्यों, क्या हुआ ?
  • मधु – माँ सुनील मुझे बहुत परेशान करते हैं 
  • माँ – अरे, अभी शुरू के कुछ दिन सब ऐसा ही रहता है, नया-नया है न, बाद में सब ठीक हो जाएगा, इसमें बार-बार यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है ।
  • मधु – नहीं माँ, बात बहुत गंभीर है, सुनील मेरे लिए रोज़ अलग-अलग कपड़े लेकर आते हैं और उन्हें मुझे ट्राई करने को कहते हैं ।
  • माँ – मतलब, ये क्या है…सुनील कपड़े लाता है, तुझे खुश रखता है, ये तो अच्छी बात है, इसमें परेशान नहीं होना चाहिए ।
  • मधु – तुम समझी नहीं, मधु ने बताया कि सुनील उसे रोज़ रूप में देखना चाहता है और ये पागलपन बढ़ता ही जा रहा है ।
  • मधु – माँ, सुनील की न जाने कौन-सी इच्छाएं हैं जो वो ऐसे पूरी कर रहे हैं, वो मुझे रोज़ अलग कपड़ों में देखकर बहुत खुश होते हैं । 
  • माँ – ये तो बहुत अजीब और हैरान करने वाली बात है, ये तो एक तरह का मानसिक रोग लगता है । Mastram Ki Kahani
  • मधु – हाँ माँ, मैं आपको यही बताना चाहती हूं और इस बीमारी के चलते मैं बहुत परेशान हो गई हूं, मैं अब और नहीं झेल सकती । उनका मेरे साथ होना मुझे डर का अहसास करवाता है, मैं उनसे कह चूकी हूं कि ये सब ठीक नहीं लेकिन वो मेरी एक नहीं सुनते और अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं ।
  • माँ – तू चिंता मत कर, मैं आज ही सुनील को बुलाती हूं ।

माँ ने सुनील को बुलाया । Mastram Ki Kahani

सुनील बहुत ही सुलझा, समझदार और बड़ों की इज्ज़त करने वाला लड़का था लेकिन वो अपनी इच्छाओं के आगे मजबूर था और सुनील अपनी लाइफ में वो सब ट्राई कर रहा था जो उसने फिल्मों में देखा था और अपने ख्वाबों में सोच रखा था । 

  • माँ ने पूछा – सुनील, कैसे हो ?
  • सुनील – मैं ठीक हूं मम्मी ।
  • माँ – ये मधु क्यों आई है, कुछ पता है तुम्हें ?
  • सुनील – थोड़ा घबराकर, नहीं मम्मी, आप ही पूछ लो, मुझे तो कुछ बताती ही नहीं ।
  • माँ – पूछा मैंने उससे ?
  • सुनील – थोडा घबराकर, तो क्या कुछ बोली ?
  • माँ – सब कुछ, तुम उसे क्यों परेशान करते हो ?
  • सुनील के माथे पर पसीने निकल आए और उसका चेहरा फीका पड़ गया । 
  • सुनील ने कहा – मतलब ?
  • माँ – मतलब तुम अच्छी तरह समझते हो और मैं भी ।

Mastram Ki Kahani अब मुझे एक बात बताओ, तुम ये सब कब बंद करोगे ?

क्योंकि ये मधु के लिए ठीक नहीं है, अगर टेंशन से मधु को कुछ हो गया तो उसका ज़िम्मेवार कौन होगा ? तुम जानते हो न कि ये तुम्हारी कितनी अजीब ख्वाहिश है । 

सुनील – नहीं मम्मी, आप यकीन मानिए मैं जानबुझकर ऐसा नहीं करना चाहता लेकिन रात को न जाने मुझे क्या हो जाता है, मैं आपा खो बैठता हूं, मुझे कुछ समझ नहीं आता और मैं अपने बस में नहीं रहता । फिर मैं वो सब करने को मजबूर हो जाता हूं जो मेरे दिमाग में है और अगर मधु वो नहीं कर पाती तो मेरा दिमाग काम करना बंद कर देता है और मुझे बहुत गुस्सा आ जाता है ।

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मैं क्या करूं मम्मी ।

  • मधु की मां – कुछ भी हो लेकिन मधु की उम्र अभी सिर्फ 22 साल है, वो न तो ये सब पसंद करती है और न ही वो ये सब समझ पा रही है, वो बहुत जल्दी बीमार हो जाएगी अगर ऐसे ही चलता रहा । सुनील ने गौर नहीं किया लेकिन मधु की माँ का इशारा कहीं और हो चुका था । उनके रंग ढंग बदल चुके थे । 
  • मधु की माँ ने कहा – जो तुम करना चाहते हो, क्या वो बंद नहीं करोगे ?
  • सुनील ने हैरान होकर कहा – मुझसे मत पूछिए, मुझे कुछ पता नहीं ।
  • मधु की माँ – चलो आओ ज़रा आराम कर लो, थक गए होंगे ।

अगले आधे घंटे में जो होने वाला था वो न सुनील ने कभी सोचा नहीं था और न ही मधु ने । लेकिन ये हो रहा था और अब सुनील की ख्वाहिशें हमेशा के लिए पूरी होने वाली थी । सुनील से कहा गया – तुम यहीं ठहरो और इंतज़ार करो ।

सुनील ने सिर हिलाया और हाँ में जवाब दिया 

दो मिनट के बाद अचानक दरवाज़ा खुला और सुनील को इशारा मिला । सुनील इतना भी नासमझ नहीं था कि उसे ये पता न चले कि हो क्या रहा है । लेकिन वो अपनी इच्छाओं के आगे इतना बेबस था कि उन्हें किसी भी तरह से पूरा करना चाहता था, ऐसा मानिए कि वो इन्हीं ख्वाहिशों के सहारे ज़िंदगी जी रहा था ।

Mastram Ki Kahani फिर वो हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी,

अचानक सुनील को चक्कर आने लगा और वो गिर पड़ा और कुछ मिनट बाद जब उसे होश आया तो उसने खुद को मदहोशी की हालत में पाया । दोनों एक दूसरे को एकटक आंखों से देख रहे थे, दोनों अब एक-दूसरे के प्यार में थे दोनों के चेहरे में शरम और हया साफ देखी जा सकती थी । सुनील पूरी तैयारी में तो नहीं था लेकिन अब वो पूरी तरह तैयार हो चुका था और अपनी ख्वाहिश के आगे वो बेबस था ।

अचनाक पैदा हुई इस भावना को उसे जल्द से जल्द अंजाम तक पहुंचाना था ।

वो खुदको मजबूत करने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा था । उसकी आंखों में प्यार के अलावा और कुछ नहीं था  और प्यार भी ऐसा जिसमें जन्मों जन्मों का साथ होता है । ज़ज्बात अब एक हो चुके थे और रिश्तों में अब करीबी आ चुकी थी । ये वक्त सिर्फ एक दूसरे को प्यार करने का था और सब वैसा ही हो रहा है जैसा मदद करने से पहले सोचा गया था । Mastram Ki Kahani

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