Muslim girl sex story

मदहोश फातिमा  (Muslim girl sex story)        

Muslim girl sex story मैं और मेरा दोस्त अबरार नौकरी की तलाश में बुलंदशहर आ गए और यहाँ किराए के मकान में रहने लगे । हम दोनों एक जीवन बीमा कंपनी में साथ काम करते थे और हमारी शिफ्ट देर रात तक चलती थी ।

नौकरी काफी थका देने वाली थी लेकिन हम दोनों साथ में हंसी मज़ाक करते तो वक्त कहां निकल जाता पता नहीं चलता था । हमारा आस-पड़ोस का माहौल भी अच्छा था, लोग काफी मिलनसार थे । पड़ोस में रिज़वान चाचा रहते थे, जो पान की दुकान चलाते थे ।

उनकी बीवी कैंसर से सालों पहले मर गई,

अब बस एक बेटी थी फातिमा जिसके बड़े होने का इंतज़ार कर रहे थे । उसकी शादी करने के बाद वो चैन से रहते थे । लेकिन फातिमा कब बड़ी हो गई ये उन्हें पता भी नहीं चला ।

पूरे मोहल्ले के मर्द उसके साथ रात गुज़ारने के सपने देखने लगे थे । कहते हुए अच्छा तो नहीं लगता लेकिन रिज़वान चाचा से कुछ कहा भी न जाए क्योंकि लड़की का मामला था । फातिमा का चाल-चलन उसी ओर जा रहा था जिस ओर अक्सर जवानी में जाता है ।

फातिमा बेकाबू घोड़ी की तरह अपने जिस्म की नुमाइश फेसबुक पर कर रही थी और उसके चाहने वाले फेसबुक पर उसे हवस से भरे लतीफे सुना रहे थे । फातिमा सोच रही थी कि वह फेमस हो रही है लेकिन वो फेसम नहीं बल्कि बदनाम हो रही थी । औरत के पास दिखाने को दो ही चीजें हैं – चूचे और गांड और कुदरत ने फातिमा को ये दोनों चीजें दी थीं।

मुस्लिम मौहल्ला होने की वजह से अक्सर औरतें पर्दा करती थी और बुर्के पहनने का रिवाज़ था । फातिमा भी बुर्का पहनती थी लेकिन उस बुर्के के अंदर बेहयायी और हवस का नंगा नाच हो रहा था ।

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फातिमा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सरेआम Muslim girl sex story

अपने बदन की नुमाइश कर रही थी, कभी सूट पहन कर चूचों का भारीपन दिखा रही थी तो कभी गांड का और उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसने कितने मर्दों की बेसब्री बढ़ा रखी थी ।

मैं अपने काम से काम रखता था, हालांकि रिज़वान चाचा के लिए बुरा तो लगता था लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था लेकिन मुझे नहीं पता था कि हवस की बेचैन का शिकार मैं ही हो जाऊंगा । पूरे मोहल्ले के लिए फातिमा मुठ मारने का ज़रिया थी और जब वो बाहर चलती तो लोगों की आँखों में उसके लिए हवस के अलावा और कुछ नहीं था लेकिन मेरा उसे इग्नोर करना या दूर रहना फातिमा को बहुत समय से खटक रहा था ।

मुझे नहीं पता था कि फातिमा मुझे नोटिस कर रही थी । दरअसल उसे वो लड़के पसंद आते थे जो उसे घास न डालें और उसके पीछे न रहें । मन ही मन फातिमा मुझे पसंद करने लगी थी । किसी को पसंद करना गलत नहीं है लेकिन पसंद के पीछे सिर्फ वासना का होना गलत है ।

खैर, मैं अपने काम में लगा रहा मैं रिज़वान चाचा की इज्जत करता था और चाहकर भी ये सब नहीं कर सकता था । लेकिन अगले कुछ दिनों में मेरे साथ वो होने वाला था जो मैनें कभी सोचा भी नहीं था ।

रिज़वान चाचा का एक्सीडेंट हो गया और वो बुरी तरह घायल हो गए ।

मैं अक्सर उनका हाल पूछने उनके घर चले जाया करता था और उनके लिए कभी जूस तो कभी फल ले जाया करता था और वहीं फातिमा मुझे अपनी वासना से भरी आँखों से देखती थी । उनके पान के धंधे को भी कुछ हद तक फातिमा हो चला रही थी लेकिन फातिमा के लिए यह सब देखना मुश्किल हो गया इसलिए उसने गांव से अपने चचेरे छोटे भाई रशीद को बुला लिया । Muslim girl sex story

एक दिन मैं चाचा का हाल पूछने गया और साथ में संतरे भी ले गया । मुझे बताया गया कि चाचा अभी आ रहे हैं, आप बैठिए । मैं बैठ गया लेकिन चाचा नहीं फातिमा आ गई । फातिमा ने सलवार सूट पहना हुआ था और वो सूट उसके बदन पर इतना कसा हुआ था जिसमें उसके बदन की पूरी शेप दिखाई दे रही थी और उसके बदन का हर हिस्सा फटके बाहर आने को मजबूर हो रहा था । मैं समझ गया कि चाचा वहाँ नहीं है इसलिए मैं उठा और जाने लगा । लेकिन तभी फातिमा आ गई और मेरा रास्ता रोक दिया ।

मैनें कहा – ये गलत है, मुझे जाने दो लेकिन फातिमा के इरादों के आगे मेरी एक न चली । फातिमा ने कहा – इसमें कुछ गलत नहीं है, मैं तुम्हे पसंद करती हूं क्या तुम नहीं करते ?

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मैनें कहा – ऐसा कुछ नहीं है लेकिन जो तुम चाहती हो वो मैं नहीं कर सकता muslim girl sex story ।

फातिमा ने फौरन अपना सूट उतार दिया और ब्रा में चूचों के साथ खड़ी हो गई । उसके मोटे गद्देदार चूचे देखकर मेरा दिमाग खराब होने लगा और मैं भटकने लगा । लेकिन फिर मैनें वहां से निकल जाने की कोशिश की लेकिन फातिमा ने इरादा किया था कि वो अपनी गरम चूत को मेरे गरम लंड से ही ठंड़ी करेगी ।

फातिमा ने पैंट के बाहर से मेरे लंड पर हाथ लगाया और मुझे होठों पर चूमने लगी । मैं भी तभी तक शांत था जब तक मेरे अंदर फातिमा ने वासना न जगा दी । मेरा लंड खड़ा होते ही रिज़वान चाचा, उनकी इज्जत और उनके साथ प्यार सब भुला बैठा और फातिमा का पजामा खोल दिया और उसे बिस्तर पर फैंक दिया । इसके बाद मैं उसकी जांघे चाटने लगा, उन्हें चूसने लगा मैं । जब-जब मैं उसके बदन को चूमता वो हिल जाती और या अल्लाह….आ….आ…..कहने लगती ।

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लेकिन अब मेरा सब्र टूट चूका था और अब मेरा लंड

भी फातिमा की चूत में घुसने को बेताब था । मैनें फातिमा से कहा तेल ले आओ….तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदूंगा । दर्द का मज़ा तब ही आएगा तुम्हें । वो तेल ले आई मैनें तेल से उसकी चूत की मालिश करनी शुरु कर दी ।

मैं जैसे-जैसे उसकी चूत को तेल से सहला रहा था वो मानो मदहोशी में डूबती चली जा रही थी और मैं इसी मदहोशी में उसकी चूत मारन चाहता था । मैनें उसकी चूत में ऊंगली दी और हिलाने लगा । आ…..आ……..मत करो ऐसा…..मैं बेकाबू हो रही हूं प्लीज़ …मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा,….थोड़ी देर में जब उसे पूरी तरह बेकाबू कर दिया तो उसकी चूत से पानी आने लगा मैनें उंगली उसके मुंह में डाल दी और उसे चटवाने लगा ।

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अब उसकी चूत चूदने के लिए पूरी तरह तैयार थी और मेरा लंड भी गीला हो गया था । मैनें कंडोम लंड पर चढ़ाया और फातिमा को अपने लंड पर बैठा दिया और लेटे-लेटे उसे चोदने लगा, थोड़ी देर में वो मदहोश होकर घोड़ी बन गई । मैने घोड़ी बनाकर चोदने से वो दर्द से तड़प उठी लेकिन ये दर्द उसे सारी जिंदगी याद रहने वाला था । Muslim girl sex story

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