Raat Ke Yatri

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Raat Ke Yatri

Raat Ke Yatri रात के यात्री दिसंबर का महीना मतलब दिल्ली में कड़ाके की ठंड और इस ठंड से बचने के लिए आप चाहे गरम कपड़े पहनें या आग जलाकर गरमी पैदा करें, ठंड आपको नहीं छोड़ेगी । लेकिन इस बार की ठंड मुझे गरमी से भर देगी ये मुझे नहीं पता था । मेरा नाम वरून है मैं दिल्ली में पिछले 4 सालों से रहता हूं और यहाँ नौकरी की वजह से ही टीका हुआ हूं वरना कभी अपने यूपी से यहाँ नहीं आता । यहां मेरा कोई नहीं है और मुझे यहां का फास्ट कल्चर भी पसंद नहीं है लेकिन यहाँ इतनी रंगरलियाँ हैं जो आपको अपनी तरफ खींच ही लेती हैं ।

शराब के लिए क्लब, बार और लड़कियाँ दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आपको भटकाने के लिए काफी हैं । मैं घर से यहीं सोचकर दिल्ली आया था कि कुछ साल यहाँ रहकर पैसा बना लूं फिर वापस अपने घर आकर रहुंगा और कुछ यहीं रहकर कर लूंगा लेकिन ज़िंदगी के किस मोड़ पर आपके साथ क्या हो जाए पता नहीं चलता ।

Raat Ke Yatri हाँ ये और बात है कि मेरे साथ जो हुआ उसमें मज़ा ज़्यादा और सज़ा कम थी ।

मैं दिल्ली के महरौली इलाके में किराए के मकान में रहता हूं और गुरूग्राम में नौकरी करता हूं । मेरी कंपनी बहुत बड़ी है और उसमें लगभग 500 लोग काम करते हैं । हर काम के लिए अलग डिपार्टमेंट और लोग रखे गए हैं और पूरा ऑफिस खूबसूरत और हसीन लड़कियों से भरा हुआ है । लड़कियां भी ऐसी जो कभी सपने में भी नहीं देखी और जिस तरह के तंग और बोल्ड कपड़े पहनकर वो ऑफिस आती हैं, तो बड़े से बड़ा सख्त इंसान भी पिघल जाए । ऐसी ही एक लड़की है – रिचा, जो बहुत खूबसूरत और देखने में आकर्षक है । रिचा के अंदर वो सारी खूबियाँ हैं जिन्हें देखकर कोई मर्द किसी औरत की तरफ आकर्षित होता है । रिचा पंजाब से है और पंजाब की लड़कियों के बारे में भला कौन नहीं जानता ।

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सबसे ज़्यादा बोल्ड, बिंदास और खूबसूरत ।

रिचा भी पंजाब से आकर यहाँ नौकरी कर रही है और गुरूग्राम में ही किराए पर रहती है । मैं कितना खुशनसीब हूं कि जो लड़की पूरे ऑफिस में मुझे पसंद आई, वो मेरी ही टीम में है और हम साथ का करते हैं । वरना मिलना तो छोड़ो, बोलना तक नसीब नहीं होता । लेकिन मेरी एक ही दिक्कत है, मैं रिचा जितना बोल्ड नहीं हूं लेकिन अगर एक बार खुल जाऊं तो फिर मुझे कोई रोक नहीं सकता ।

रिचा को ये बात पता नहीं थी और यही हमारे मिलन की सबसे बड़ी वजह बनी । रिचा को मेरी यही खूबी भा गई और वो और मैं अच्छे कलीग बन गए । लेकिन साथ में काम करना अलग बात है और मोहब्बत करना अलग । मैं रिचा के पास रहने और उससे किसी न किसी तरह बात करने का बहाना ढू़ंढता रहता था क्योंकि मैं ये जानता था कि भले ही रिचा के पीछे लड़कों की लाइन लगी हो लेकिन लड़की उसी लड़के को मिलती है जो उसके सबसे करीब रहता है ।

रिचा से प्यार होता तो अलग बात थी,

उसे देखते ही मेरे अंदर जैसे लावा फूटने लगता था । रिचा का शरीर इतना गठीला और टाइट था कि उसकी तरफ मेरी आंखें हटती ही नहीं थी । रिचा न चाहते हुए भी अपने शरीर की खूबियों को छुपा नहीं सकती थी और यहाँ तो रिचा उन्हें दुनिया को दिखा रही थी । पूरे ऑफिस के मर्दों का तापमान बढ़ा हुआ था, हर कोई रिचा को इंप्रैस करने में लगा हुआ था लेकिन मैं ये जानता था कि रिचा ऐसे बस में नहीं आएगी । शुरूआत दोस्ती से करनी होगी और एक बार अगर दोस्त बन गए, तो फिर काम पैंतीस होने में वक्त नहीं लगेगा । 

मैनें एक सैकेंड हैंड गाड़ी ले ली और उसे लेकर ऑफिस गया ।

  • रिचा ने मुझे ऑफिस के नीचे देखा और बोली – अरे वाह लड़के, नई गाड़ी ले ली, क्या बात है 
  • मैनें कहा – अरे नहीं यार, सेकेंड हैंड है ।
  • रिचा – तो क्या हुआ, गाड़ी तो गाड़ी होती है 
  • मैनें कहा – हाँ यार
  • रिचा – लेकिन एकदम से कैसे ले ली ?
  • मैनें कहा – एकदम से कहाँ, पिछले साल से मन बना रहा हूं लेकिन अभी तक ले नहीं पाया । 

मैनें रिचा को ये कहकर टाल दिया लेकिन असली वजह नहीं बताई क्योंकि गाड़ी उसके और मेरी बीच की दूरी को कम करने का एक बहुत बड़ा ज़रिया था । मैं खरगोश की चाल चल रहा था, मुझे इस बात की भी कोई चिंता नहीं थी कि रिचा पर दस लड़के और ट्राई कर रहे हैं, मैं बस अपना गेम बना रहा था । Raat Ke Yatri

अब ऑफिस की छुट्टी हुई और मैं गाड़ी में बैठकर जाने लगा, मैनें देखा रिचा कैब का वेट कर रही है ।

  • मैनें गाड़ी का शीशा नीचे करके कहा – क्या हुआ 
  • रिचा – कुछ नहीं 
  • मैनें कहा – तो यहाँ क्यों खड़ी हो
  • रिचा – कैब का इंतज़ार है 
  • मैनें कहा – ओके बाय, और मैं वहां से चला गया । 

आप सोच रहे होंगे कि मैनें गाड़ी में बैठने के लिए क्यों नहीं कहा ।

तो उसका जवाब ये है कि कोई भी ऐसी लड़की जिसे आप पसंद करते हो और अपना बनाना चाहते हो तो आपको पहला खेल यही दिमाग में रखना है कि आपको उतना ही झुकना है कि आपकी इज़्जत बची रहे क्योंकि कोई भी लड़की आपको दोस्त तो बना सकती है लेकिन वो खुद के लिए उसे ही चुनती है जिसमें कुछ दम हो, जो खुद पर भी विश्वास करता हो । 

रिचा अगले दिन मुझे फिर दिखी और अब मैनें गाड़ी का शीशा तक नहीं खोला और मैं सीधे निकल गया । इसके बाद तकरीबन एक महीने तक ऐसा ही चला और फिर अचानक एक दिन ये हुआ कि जब मैं निकल रहा था तो ऑफिस के गेट पर रिचा गाड़ी के सामने आ गई और बोली – हाय, आज कैब नहीं मिल रही, क्या तुम मुझे छोड़ दोगे । 

  • मैनें कहा – कहां जाना है 
  • उसने कहा – सेक्टर 32
  • मैनें कहा – नहीं वहां तो नहीं जा रहा मैं, हाँ लेकिन मेट्रो स्टेशन छोड़ दूंगा ।
  • रिचा का मुंह बन गया और बोली – ठीक है, वहीं छोड़ देना 
  • फिर क्या था, गेम बिल्कुल मेरे हिसाब से चल रहा था । मैनें रिचा को मेट्रो पर छोड़ा और जब रिचा उतरने लगी तो मैनें कहा – रुको ज़रा 
  • रिचा – क्या हुआ वरून
  • मैनें कहा – 9 बज गए हैं और ये सुनसान भी दिख रहा है, मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं Raat Ke Yatri

रिचा के चेहरे पर चमक आ गई और वो टकटकी निगाहों से मुझे देखने लगी ।

अब मैं गाड़ी चला रहा था और रिचा सिर्फ कोरी आंखों से मुझे देख रही थी लेकिन मैंने अपना सारा ध्यान गाने पर लगा रखा था । इतने में मैनें एक रोमांटिक गाना लगा दिया और उस गाने में एक खिंचाव, एक तलब थी जो मर्द और औरत के रिश्ते को नया नाम दे रहा था, गाने से रिचा को कुछ होने लगा था, वो कुछ महसूस करने लगी थी । लेकिन आज सिर्फ इतना ही करना था, रिचा का घर आ गया और उसने मुझे थैंक्यू कहा और बोली, अंदर आ जाओ, चाय पीकर जाना । 

मैनें कहा – फिर कभी और मैं चल निकला ।

अगले दिन रिचा पूरे दिन ऑफिस में मुझसे बात करती रही और उसकी आंखों में मेरे लिए मैनें एक चमक देखी । अब ऐसा होने लगा कि हफ्ते में 2 बार मैं रिचा के घर तक उसे छोड़ने जाने लगा और वहीं से शराब या खाना खाकर आने लगा । इतने में मैनें एक नईं चाल सोची । मैनें ऑफिस में ये बात फैला दी कि मैं घर ढूंढ रहा हूं और अगर कोई मुझे किराए का अच्छा घर दिलवा दे तो वो वहां रह सकता है । ये बात रिचा के कानों तक पहुंची और वो मेरे पास आई और बोली – तुम गुड़गांव में घर ढूंढ रहे हो क्या ?

  • मैनें कहा – हाँ क्या हुआ 
  • रिचा –  तो मुझे क्यों नहीं बताया 
  • मैनें कहा – क्योंकि लड़कियाँ इन सब मामलों में ज़्यादा नौलेज नहीं रखती इसलिए नहीं बताया ।
  • रिचा ने कहा – ऐसा कैसे सोचा तुमने, चलो कोई बात नही, मुझे बताओ, कहाँ चाहिए और बजट कितना है । 
  • मैनें कहा – यार बजट ज़्यादा नहीं है, मैं तो कोई पार्टनर ढूंढ रहा हूं जो रूम शेयर कर ले ।
  • रिचा ने कहा – जहाँ मैं किराए पर रहती हूं, वहाँ ठीक-ठाक बजट में अच्छा फ्लैट मिल जाएगा ।
  • मैनें कहा – कितने में मिल जाएगा ?
  • रिचा – 8 हजार में
  • मैनें कहा – मेरा बजट 5 से ज़्यादा नहीं है क्योंकि गाड़ी और बाकि चीजों को भी देखना है ।
  • रिचा की आंखों में एक शरारत उतर आई लेकिन उसने उस वक्त कुछ नहीं कहा और रात को स्नैपचैट पर मैसेज भेजा ।
  • रिचा – हाय वरून, अगर तुम्हें कोई इश्यू नहीं है तो तुम मेरे साथ रूम शेयर कर सकते हो, 8 हजार किराया है, तो 4 – 4 हज़ार में हो जाएगा । तुम्हें भी फायदा है और मुझे भी ।

मेरी तो जैसे खुशी का ठिकाना नहीं रहा ।

मछली जाल में फंस ही गई लेकिन मैनें ज़रा सी भी हड़बड़ी नहीं दिखाई और मैसेज भेजा – मैं सोचकर बताऊंगा ।

  • रिचा – हां, ठीक है 
  • फिर अगले 4 दिनों तक मैनें कोई जवाब नहीं दिया और पांचवे दिन रात को रिचा को मैसेज किया – ठीक है, हम शेयरिंग कर लेते हैं ।
  • रिचा – परफेक्ट, आ जाओ, कब आओगे
  • मैनें कहा – आज गुरूवार है और कल शुक्रवार । मैं शनिवार को शिफ्ट कर लेता हूं क्योंकि फिर संडे आराम कर लूंगा ।
  • रिचा – ठीक है, आ जाओ ।

मैं शनिवार को सुबह 10 बजे रिचा के फ्लैट पर आ गया और सामान शिफ्ट करने लगा ।

अब रिचा और मेरे बीच में हर दूरी और फांसला कम हो गया । मैं ये समझ चुका था कि रिचा मेरी तरफ पूरी तरह आकर्षित हो गई है और अब बस एक ठीक मौका देखकर मैं रिचा के साथ वो रिश्ता कायम कर लूंगा, जो रिचा और मेरे बीच की सारी हदें पार कर देगा और फिर हर रात रंगीन हो जाएगी । अब मैं और रिचा सुबह मेरी गाड़ी में साथ ही ऑफिस आने और जाने लगे । फिर घर पहुंचकर साथ में ही खाना-पीना और रहना होता था और किराए से लेकर सबकुछ आधा-आधा बंट रहा था । अब एक दिन मैंने Raat Ke Yatri

  • रिचा से कहा – रिचा दरवाज़ा बंद कर लो, मैं बाहर जा रहा हूं, 2 से 3 घंटे लग जाएंगे ।
  • रिचा – कहाँ जा रहे हो ?
  • मैनें कहा – आज गाड़ी में बैठकर लॉंग ड्राइव पर जाने का मन है ।
  • रिचा – तो क्या अकेले ही ?
  • मैनें कहा – हाँ अभी तो अकेले जा रहा हूं, अगर तुम्हारा मन है तो आ सकती हो ।
  • रिचा ने घर की चाबी पकड़ी और बोली, चलो । 
  • बस, मैनें पहले से ही गाड़ी में बियर रखी हुई थी । हम गाड़ी में बैठे और निकल पड़े । 
  • मैनें रिचा से कहा – वो बॉक्स खोलना ज़रा 
  • रिचा ने बॉक्स खोला और कहा – वाओ, बियर 
  • मैनें कहा – पियो यार आज रात बड़ी लंबी और हसीन होने वाली है ।

रिचा ने बियर खोलकर मुझे दी और हम दोनों एक ही बियर बार-बार मुंह से लगाकर पीने लगे ।

तीन बियर तक तो ठीक था लेकिन अब रिचा मदहोश हो गई थी और बड़बड़ाने लगी थी । मुझे भी हल्का नशा होने लगा और अब वो वक्त आ गया जिसका इंतज़ार मुझे पिछले कईं महिनों से था । मैनें एक अच्छी और सुरक्षित जगह देखकर गाड़ी पार्क कर दी और अब हम दोनों आराम से बीयर पर बीयर पी रहे हैं । 

  • रिचा – यार वरून, तुम बहुत स्वीट हो 
  • मैनें कहा – तो क्या खा जाओगी 
  • मैं पूरे मूड में था और रिचा मेरी तरफ देखने लगी ।
  • रिचा – काश, खा सकती लेकिन हाँ अगर मन हो गया तो खा ही जाऊंगी 
  • मैनें कहा – इतना आसान नहीं है

रिचा ने न आव देखा न ताव, मेरे होठों पर चुंबन कर दिया और लगातार करती ही रही ।

पहले तो मुझे बहुत अजीब लगा लेकिन कुछ देर के बाद मेरे बदन में बिजली सी कौंधी और मैं भी गरम हो गया । उसके बाद गाड़ी का तापमान गरम होने लगा । हम दोनों के चुंबन की सिसकियों से गाड़ी का हर कोना गूंजने लगा । होठों का ऐसा तालमेल और  रस्साकस्सी पहले कभी मैनें महसूस नहीं की थी । मैं रिचा के ऊपर हावी हो रहा था और वो मेरे ऊपर । न जाने रिचा के अंदर क्या भरा हुआ था जो वो रूकने का नाम नहीं ले रही थी । मैं समझ गया था कि आज ही सारी सीमाएं टूटने वाली हैं । मैनें गाड़ी की सीट पीछे की और मैं पीछे की ओर होकर लेट गया । Raat Ke Yatri

रिचा की गरम आहें मेरी गरम आहों से मिलने लगी थी और हम दोनो के दरमियां एक अलग ही रिश्ता कायम हो रहा था । उसकी आंखों में प्यार उतर आया था और उसके शरीर का हर अंग तड़पने लगा था । वो मचल भी रही थी और कांप भी रही थी , मैं समझ चुका था कि अब यहाँ से मेरा काम शुरू होता है और उसकी तड़पन और कंपन ने मुझे बैचेन कर दिया था ।

Raat Ke Yatri मैनें फौरन रिचा को अपने ऊपर हावी होने के लिए छोड़ दिया

और रिचा के मन में जो आ रहा था वो कर रही थी । न जाने कितने सालों से उसके अंदर ये सब भरा हुआ था । वो आज पूरी तरह मुझमें खो जाना चाहती थी । मेरी कमीज़ के अंदर उसने अपना हाथ डाला और वो मदहोश हो गई । हम दोनों के मिलन की शाम आ चुकी थी और मेरे पास इस आग को भड़काने के सारे हथियार मौजूद थे । मैं सिर्फ रिचा का साथ दे रहा था, बाकि काम रिचा ही कर रही थी । वो मेरी सवारी कर रही थी और मैं उसे जन्नत की सवारी करवा रहा था ।

वो कभी अपने बालों को ऊपर की ओर समेटती तो कभी मेरे सीने पर हाथों से जोर लगाती ।

रिचा झूल रही थी और मैं उसे झूला रहा था । रिचा को झूलने में मज़ा आ रहा था और मुझे झूलाने में । हम दोनों की ही आंखें पूरी तरह बंद थी । हम दोनों बस एक दूसरे में खोना चाहते थे और खो भी गए । हमें पता नहीं चल रहा था कि ये रात कब खत्म होगी । मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि रात खत्म हो और न ही वो जो हमारे बीच हो रहा था । रिचा बार-बार मेरा नाम ले रही थी और मुझे प्यार और बेताबी भरी आंखों से देख रही थी । अब न वो बचकर जाना चाहती थी और न ही मैं । रिचा ने ये कभी नहीं सोचा था कि मैं उसे रात की एक ऐसी यात्रा पर ले जाऊंगा जिसे वो कभी भूल नहीं पाएगी । Raat Ke Yatri

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