Rakhi Ki Bechaini

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Rakhi Ki Bechaini राखी की बेचैनी

Rakhi Ki Bechaini राखी ने अभी-अभी 10वीं कक्षा पास की है और उसके शराबी बाप ने पैसों के लालच में राखी की शादी एक 40 साल के इंसान से तय कर दी है । राम कुमार वाजपेयी एक अमीर इंसान है जिसके पास पैसा और दौलत तो लुटाने के लिए बहुत है लेकिन पत्नी के 10 साल पहले ही भरी जवानी में मर जाने से अकेलापन इतना है कि वो दूर ही नहीं होता । दो बच्चों को अमेरिका भेज दिया है और पिछले 7 सालों से बाजपेयी जी बिल्कुल अकेले हैं । कभी बाज़ार जाकर औरतों को खरीद लाते हैं तो कभी खुद कईं दिनों तक किसी होटल के कमरे में दिन रात अपनी गुज़र रही जवानी को रोक देने की पूरी कोशिश करते हैं ।

होटल वालो को भी बाजपेयी जी से अच्छा पैसा मिलता है और इसलिए कईं बार वो खुद लड़कियों और औरतों का इतज़ाम कर देते हैं ।

बाजपेयी जी को कभी इस बात की भनक भी नहीं थी उनकी शादी एक 17 साल की कमसिन लड़की से हो जाएगी जो उम्र में उनकी बेटी के बराबर ही है । लेकिन ये जिस्म की भूख ऐसी होती है जो न उम्र का लिहाज करती है न रिश्तों का । राखी को बाजपेयी जी के साथ ब्याह दिया गया और पहली रात राखी पर बहुत भारी बीतने वाली थी । बाजपेयी कईं दिनों से इस रात के इंतज़ार में अपने आप को रोके हुए थे लेकिन उन्हें पता नहीं था कि राखी खुद को उन्हें सौंपने को तैयार नहीं थी । 

बाजपेयी जी राखी के पास बिस्तर में आकर बैठे और कहा – कैसा लग रहा है तुम्हें ?

राखी – डर लग रहा है, आप क्या करोगे मेरे साथ

राखी की आवाज़ में बहुत कंपन था, वो सहमी हुई थी और बाजपेयी जी ने ये डर भाप लिया और कहा – अरे, कुछ नहीं तुम इनता क्यों डर रही हो । जैसे अपने घर रहती हो वैसे ही इस घर में रहो और मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करूंगा । ये कहकर बाजपेयी जी ने दुध का गिलास राखी को दिया और कहा पीकर सो जाना । लेकिन बाजपेयी जी एक मंझे हुए खिलाड़ी थे, वो जानते थे कि अगर सोफे पर सोएंगे या कमरे से बाहर चले जाएंगे तो वो भी ठीक नहीं होगा । इसलिए मुंह को फेरकर उसी बिस्तर पर सो गए ताकि राखी को उनकी आदत भी लगी रहे । 

Rakhi Ki Bechaini कुछ महिनों तक रातें यूं ही देखभाल और सहमें-सहमें कट गई लेकिन जवानी कहाँ किसी को छोड़ती है,

अगर जवानी पर लगाम न हो तो वो पहले कम उम्र वाले को ही बेसब्र करती है । बाजपेयी जी रोज़ ऐसा इत्र लगाकर आते थे जिससे तनबदन में बेचैनी हो जाती थी और वो अपनी तरफ खींचता था । कुछ महीनों बाद राखी के मन में भी मर्द की गरमी और उसका स्पर्श पाने की आग भड़क उठी लेकिन कहे कैसे ?

अब वो बाजपेयी जी को रिझाने की कोशिश करने लगी । वो कभी पल्लू नीचे गिरा देती तो कभी ब्लाउज छोटा पहनती तो कभी शरारती निगाहों से इशारे करती लेकिन बाजपेयी जी अपना खेल खेल रहे थे । वो जानते थे कि अभी उम्र सिर्फ 17 साल है और अगर इस उम्र में वो राखी को इतना बैचेन कर दें कि वो उन्हें पाने के लिए तड़प उठे तो उन्हें उससे कुछ समय के लिए बिल्कुल इग्नोर करना होगा और ये काम कर रहा था । राखी को मर्द की तड़प थी,

उसकी जवानी उसे हर मोड़ पर बेचैन करती जा रही थी लेकिन बाजपेयी जी बिस्तर पर उसे सिर्फ सहानुभूति और आश्वासन दे रहे थे ।

एक दिन बाजपेयी जी बाथरुम में नहा रहे थे अचानक पीछे से राखी आ गई और बाजपेयी जी के जिस्म पर बूंदों की झपकार लगाई । बाजपेयी जी खुश हुए और वो ये समझ रहे थे कि उनका पैंतरा काम कर रहा है और अब हर रात राखी के लिए बेचैन करने वाली थी, वो रात को कुछ करना चाहती थी और इतना ही नहीं, बाजपेयी जी ने उसको नया फोन लाकर दिया जिसमें वो दिन भर मर्द और औरत के बीच रिश्तों की गरमी देख-देखकर किसी भट्टी की तरह जलने लगी थी । 

एक रात बाजपेयी जी जैसे ही बिस्तर पर आए,

  • राखी ने अपना सर उनकी जांघों पर रख दिया और कहा – आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं, आप मुझे प्यार नहीं करते 
  • बाजपेयी जी ने कहा – नहीं जान, ये तुमसे किसने कहा, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं
  • राखी – तो आप मुझसे दूर-दूर क्यों भागते हैं
  • बाजपेयी – मैं दूर नहीं भागता, मेरे पास काम बहुत है, उसे नहीं छोड़ सकता न
  • राखी – तो क्या मेरे लिए थोड़ा वक्त नहीं निकाल सकते, कम से कम बिस्तर पर तो हम दोनों अकेले होने चाहिए
  • बाजपेयी ने फौरन कहा – और हम बिस्तर पर क्या करेंगे भला
  • राखी – जो आप करना चाहो, और जो मैं करना चाहूं 
  • बस इतना कहने की देर थी, बाजपेयी जी के हाथों में सारा खेल आ चुका था उन्होनें अपने दोनों हाथों से राखी की कमर को कसकर पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचा और कहा – देख लो, मैंने पकड़ा तो फिर छोडूंगा नहीं ।
  • राखी – तो यहाँ छुटना कौन चाहता है ।
  • बाजपेयी जी – दर्द भी होगा 
  • राखी – तो दीजिए न, मैं तड़प रही हूं 

बस फिर क्या था, बाजपेयी जी ने अपनी पकड़ राखी पर बना ली और उसके बाद जैसा-जैसा बाजपेयी जी करते गए,

राखी उनका साथ देने लगी । कमरा गर्म आहटों और सिसकियों से गूंजने लगा । आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी, क्योंकि न बाजपेयी जी को नींद आने वाली थी और न ही वो राखी को सोने देते । एक दूसरे से लिपटकर दोनों कुछ घंटों तक बस एक दूसरे का स्पर्श, गर्म आहें, जिस्म से जिस्म की गरमी को महसूस कर रहे थे । कभी बाजपेयी जी ऊपर होते तो कभी राखी नीचे और कभी राखी ऊपर । बाजपेयी जी राखी के साथ वो सब अनुभव बांट रहे थे जो उनके पास था । राखी बेसूद दीवानी सी हो गई थी और बाजपेयी जी के हर स्पर्श में मदहोश होती जा रही थी । होठों से शुरू होने वाली कहानी जांघों तक पहुंच गई थी लेकिन अभी परमसुख का क्लाइमैक्स बाकि था ।

Rakhi Ki Bechaini राखी न चाहते हुए भी खुद को रोक नहीं पा रही थी क्योंकि उम्र ही बहुत कच्ची थी,

किसी तरह का कोई विचार दिमाग में नहीं था और भरी जवानी बहुत भारी हो गई थी । इस कच्ची उम्र में जहाँ बह गए बस बह गए, सही क्या है गलत क्या, इसका भी अंदाज़ा नहीं लग सकता । राखी बाजपेयी साहब को वो सुख दे रही थी जिसे उन्होंने पहली शादी के बाद भी भी महसूस नहीं किया था और ये सुख इसलिए भी बहुत खास था कि एक तरफ बाजपेयी जी की जवानी जा रही थी और दूसरी तरफ राखी की जवानी आ रही थी । दोनों के बीच जिस्मों को पाने की बेताबी बहुत  थी और दोनों की जिस्म जल रहा था,दोनों अपने-अपने हिस्से की आग को बुझाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे । बाजपेयी जी ने राखी को कुछ दर्दनाक अनुभव भी दिए लेकिन राखी के लिए वो किसी उपहार से कम नहीं था क्योंकि कली खिलकर फूल बनने को तैयार थी ।

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