Saraswati mata

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Saraswati mata श्रेष्ठ सरसवती हैं परंतु सम्मान हमेशा लक्ष्मी को मिलेगा राधे, राधे मित्रों, आज के इस लेख में हम आपको एक और ज्ञानवर्धक बात बताने जा रहे हैं जो हमारे जीवन से पूरी तरह मेल खाती है ।

दोस्तों, एक बार ये बहस छीड़ी कि माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी में से कौन श्रेष्ठ है और यह बहस बढ़ते-बढ़ते इतनी बढ़ी कि देवलोक से लेकर पाताल लोक तक हाहाकार मच गया । सबसे पहले दोनों माताएं परमपिता ब्रह्मा के पास गईं और उनसे निर्णय लेने को कहा ।

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ब्रह्मा जी ने कहा कि श्रेष्ठता के इस प्रश्न का उत्तर तो सिर्फ महादेव ही दे सकते हैं, Saraswati mata

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इसलिए आप उनके पास जाइए । जब दोनों देवियाँ महादेव शिव के पास गईं तो वे ध्यान में थे । दोनों माताओं ने शिवजी से प्रार्थना कि और जब शिव जागे तो उन्होंने कहा कि तीनों लोकों में इसका जवाब श्रीहरि विष्णु के अलावा और कोई नहीं दे सकता, इसलिए आप दोनों श्रीहरि विष्णु के पास जाकर इसका उत्तर खोजें, वहाँ आपको ये उत्तर अवश्य मिलेगा । 

भगवान विष्णु शेषनाग पर आसीन होकर बैठे थे और दोनों माताएं बहुत विचलित और परेशान थीं ।

विष्णु ने पूछा – कहो देवी, कैसे आना हुआ ?

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लक्ष्मी मां ने कहा – हे प्रभु, आप तो सब जानते हैं, कृपा करके मुझे बताइए कि हम दोनों में से कौन श्रेष्ठ है और ये उत्तर आप ही देंगे, कोई और नहीं । 

भगवान विष्णु जी ने कहा – हे देवी, घड़ा मिट्टी से बनता है, सब मिट्टी से बने घड़े का मोल चुकाते हैं और उसे उपयोग करते हैं लेकिन इसका अर्थ ये नहीं होता कि मिट्टी का मोल कम है । मिट्टी से बनने वाले घड़े का अपना मोल है और मिट्टी का अपना । इसी प्रकार आप दोनों भी अलग नहीं, बल्कि एक ही हैं । एक के बिना दूसरा अधूरा है । जिसके पास लक्ष्मी होगी, निसंदेह उसके पास सरस्वती अवश्य होगी और जिसके पास सरस्वती होगी, निसंदेह उसे लक्ष्मी अवश्य मिलेगी ।

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माताएं इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुईं और आगे कहा – प्रभु हमें उदाहरण में न उलझाएं, बस ये बताएं कि श्रेष्ठ कौन है । Saraswati mata

नारायण ने जवाब दिया – हे माताओं, श्रेष्ठता इंसान में नहीं, उसके गुणों में होती है और आप दोनों ही अपने-अपने स्थान पर श्रेष्ठ हैं इसलिए ज्ञान और धन को आपस में न मिलाएं बल्कि आप दोनों को पाकर ही मनुष्य पूर्ण माना जाता है । खैर, माताएं संतुष्ट हो गईं और परस्पर प्रेम पूर्वक रहने लगीं ।

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परंतु समय बीतता गया और आखिरकार कलयुग का प्रारंभ हुआ और आज भी ये लगातार चल रहा है । हम धीरे-धीरे घोर कलयुग की ओर बढ़ रहे हैं और इस बढ़ते कलयुग ने इस श्रेष्ठता के उस प्रश्न का जवाब दिया है । सरस्वती हमेशा श्रेष्ठ है क्योंकि जिसके पास सरस्वती नहीं, उसके पास तो धन हो सकता है लेकिन जिसके पास धन है, ये आवश्यक नहीं कि उसके पास सरसवती भी हो । बढ़ते प्रभाव के साथ ये बात सिद्ध होती जा रही है कि सरसवती तो श्रेष्ठ है लेकिन अब सम्मान अधिक लक्ष्मी को ही मिलता है । Saraswati mata

प्रेम से बोलो राधे-राधे !

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