Sarita aunty ki chudai

Sarita aunty ki condom chudai सरिता आंटी मम्मी की दोस्त थी और पड़ोस में ही रहती थी । मैं जब भी कॉलेज से आता था आंटी मम्मी से ही बात करती दिखती थी । मैं नमस्ते कहकर चला जाता था और कभी-कभी आंटी मुझे अपने पास खींचकर बिठा दिया करती थी और कहती थी कि – लड़का जवान हो रहा है । ( Hindi Sex Story ) मैं हंसी में बात टालकर चला जाता था लेकिन मैं नहीं जानता थी कि आंटी के इरादे क्या हैं ।

आंटी मुझे किस बहाने से झू रही थी इसका भी मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था । एक दिन मैं कॉलेज से सुबह जल्दी ही वापस आ गया और उसके बाद मुझे अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाना था । घर आया तो देखा कि घर पर कोई नहीं है और चाबी ऊपर वाले अंकल के घर पर थी । अंकल ने कहा कि – तेरी मम्मी पड़ोस में है और चाबी देकर गई है, यो लो चाबी ले लो । मुझे कुंडी और ताला खोलने में आलस आ गया मैनें कहा – चाबी आप अपने पास ही रखिए अंकल, मैं मम्मी से मिलकर ही आ जाता हूं । जब घर गया तो देखा दरवाज़ा खुला हुआ था और मम्मी थोड़ी दूर सब्जी वाले से सब्जी ले रही है, मैं वहीं इंतजार करने लगा ।

मम्मी ने मुझे देख लिया था और मैं कॉलेज का बैग मम्मी को देकर बाहर जाने को बेचैन था लेकिन मम्मी बहुत देर कर रही थी । मैनें सोचा कि घर के अंदर जाकर बैग रख देता हूं और निकल जाता हूं । मैं सरिता आंटी के घर में चला गया और अंदर के कमरे से जैसे ही बैग रखकर बाहर निकला

सरिता आंटी बाथरुम से ब्रा और पैंटी में बाहर निकली । Sarita aunty ki condom chudai

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कसम से उस वक्त उन्हें कोई भी देखता तो पागल हो जाता । आंटी के बाल पूरी तरह भीगे हुए थे । होंठ गुलाबी और जिस्म जैसे दूध से नहाकर निकली हो । ब्रा के अंदर आंटी के चूचे बाहर आने को बेताब थे, मैनें अपनी आंखों से इतने आकर्षक चूचे पहले कभी नहीं देखे थे । आंटी ने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी और उनकी वो पैंटी उनकी चूत में घुसी हुई थी जिस वजह से उनकी चूत की शेप पूरी तरह नज़र आ रही थी । मैं आंटी को देखकर पूरी तरह से चौंक गया लेकिन सरिता आंटी ज़रा सा भी नहीं चूकी बल्कि वो मेरे पास आई और मेरे गाल पर अपने होठों से एक चुंबन दे दिया । आंटी दरवाजे की तरफ गई और दरवाज़ा बंद कर दिया और फौरन अंदर आ गई ।

आंटी ने मुझे खींचकर कमरे में अपने साथ डाल दिया और फिर अपनी मैक्सी उतार दी ।

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मेरा तो जैसे दिमाग ही खराब हो गया । मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था इससलिए मैं वहां से जाने लगा लेकिन सरिता आंटी ने मुझे सोफे पर इस तरह बैठा दिया था कि मेरा उठकर जाना नामुमकिन सा हो गया । अब आंटी मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और पीछे हुक खोलकर ब्रा उतार दी । आंटी के चूचे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया और आंटी उन चूचों को इस कदर हिला रही थी जैसे पेड़ पर लगे आम हिलते हैं । आंटी के चूचे बहुत बड़े और टाइट थे और अब आंटी ने अपनी पैंटी मेरे सामने उतार दी । आंटी ने कहा – कभी आम चूसा है तूने?

मैनें कहा – हां, और आंटी ने मेरे हाथ को अपनी चूत में दे दिया और चूत को मसलवाने लगी । मेरा लंड पूरी तरह गीला हो गया था और अब आंटी की चूत में गीली हो चूकी थी । आंटी मेरा हाथ चूत से हटाकर अपनी जीब से चाटने लगी । न जानें मुझे क्या हो गया था मैं आंटी के बदन को देखकर बहक गया था ।

मुझे यह तक पता नहीं लगा कि आंटी और मेरे बीच जो हो रहा था या हुआ अगर इसका किसी को पता चल गया तो क्या होगा । Sarita aunty ki condom chudai

मम्मी ने अगर यह सब देख लिया तो क्या होगा । लेकिन मैं कुछ सोच नहीं पा रहा था । सरिता आंटी पूरी तरह मेरे दिलो दिमाग पर काबू कर चुकी थी । मैं सरिता आंटी को याद करके मुठ मारने लगा था, उनके चूचों का वो भारीपन, उनकी चूत का मेरे हाथों से मसलवाना और फिर उनकी गीली चूत मुझे बेचैन कर देती थी । मेरी रातें सरिता आंटी की याद में मुठ मारते-मारते बीत रही थी । एक दिन मैनें देखा कि सरिता आंटी के पति अपने बच्चों के साथ बाहर गए हैं मैं फौरन मौके का फायदा उठाकर उनके घर चला गया । मैनें कहा – आंटी, क्या आप घर पर हैं ?

कोई आवाज़ नहीं आई तो मैनें देखा कि आंटी बाथरुम में नहा रही थी, मैं आज मौके को गवाना नहीं चाहता था इसलिए फौरन दरवाजे पर गया और दरवाजा बंद कर दिया । उसके बाद मैं धीरे-धीरे बाथरुम की तरफ बढ़ा और बाहर से कहा – आंटी मैं हूं, आपके घरवाले सब बाहर निकल गए हैं, क्या घऱ में कोई नहीं है क्या ?

अंदर से आवाज़ आई – है तो सही, मैं जो हूं तुम जो हो ।

ये कहकर सरिता आंटी ने आज अपनी चुदाई फिक्स कर ली थी और अब मैं भी तैयार था । मैनें बाथरुम का दरवाजा खटखटाया । आंटी नहीं खोल रही थी, लकिन जब मैनें बार-बार ऐसा किया तो आंटी ने दरवाजा पूरा खोल दिया और मुझे अंदर खींच लिया । आंटी पूरी तरह अपने बदन की नुमाइश कर रही थी । आंटी पूरी तरह भीगी हुई थी, उनके बालों ने उनके चूचे छुपाए हुए थे और वह बहुत घबराई हुई थी ।

अब मुझे आगे कुछ नहीं करना था क्योंकि सब आंटी के हवाले था । आंटी ने सबसे पहले मेरे होठों पर अपने गर्म और रसभरे होंठों को रख दिया और मसलने लगी । होंठों से होठों के ऐसा चूमा कि लंड खड़ा हो गया । अब आंटी मेरे कपड़े खोलने लगी। सबसे पहले उन्होंने मेरी पैंट खोली और मेरा लंड चाटने लगी ।

जब सरिता आंटी लंड चाट रही तो ऐसा लग रहा था मानों यही जन्नत है

लेकिन जब उसने मुंह में लिया और तेज तेज मुंह में लेने लगी तो मानों मेरे चरमसुख की कोई सीमा नहीं रही । काफी देर तक लंड चूसने के बाद वो बैड पर लेट गई और मुझे चूत चाटने के लिए कहा । मैनें वैसा ही किया -चूत की चटवाई करने लगा । चूत को चाटते-चाटते कईं बार ऐसा हुआ कि मैं चूत को चूस रहा था और जब भी मैं उसकी चूत तो चाटता तो आंटी मदहोशी में पागल हो जाती ।

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अब आंटी ने अपनी टांग उठाई और मुझे लंड डालने को कहा । मैनें लंड डाला और जोर जोर से चोदने लगा । आंटी बहुत खुश थी । कईं सालों बाद उसे एक जवान लंड हासिल हुआ और इसीलिए आज वो आगे,पीछे हर तरफ से चूदाई के लिए तैयार थी । मैनें सरिता आंटी की चुदाई के लिए एक नहीं 3 कंडोम की ज़रुरत पड़ गई । Sarita aunty ki condom chudai