telugu romantic stories

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रश्मि जवान हुई

telugu romantic stories जवानी के दिन ज़िंदगी के वो दिन होते हैं जब न तो कुछ समझ आता है और न ही हम समझना चाहते हैं, हम बस मौज-मस्ती करना चाहते हैं । बात भी सही है, जवानी एक बार अगर चली गई तो फिर कभी लौटकर नहीं आती और जवानी के दिन सबसे अनमोल होते हैं क्योंकि जवानी में ही इंसान को सबसे ज़्यादा भाव मिलते हैं चाहे वो नौकरी हो या छोकरी,  हर कोई लाइन में लगा रहता है । मगर जवानी में अगर कदम ज़्यादा बहक जाएं तो बात बिगड़ भी सकती है जिसका नतीजा फिर सारी उम्र भुगतना पड़ता है । 

telugu romantic stories रश्मी एक इज्जतदार घराने की लड़की थी और अभी-अभी कॉलेज में कदम रखा था ।

कॉलेज से पहले मां-बाप ने रश्मी को अपनी निगरानी में रखा था ताकि रश्मी के कदम बहकें नहीं और रश्मी अपनी पढाई पर फोकस कर सके । लेकिन कॉलेज में वो रश्मी का पीछा नहीं कर सकते थे और यहाँ उन्हें रश्मी को छोड़ना पड़ा । रश्मी शुरू से माँ-बाप की छाया में पली-बढ़ी लेकिन उसे हमेशा अपने मन की नहीं करने दी गई । हालांकि रश्मी एक होशियार और समझदार लड़की थी । हमेशा 90 और उससे ज़्यादा नंबर लाने वाली लड़की लेकिन थी तो लड़की ही न ।

telugu romantic stories उसके भी कईं अरमान थे और जब जवानी सिर चढ़कर बोलती है तो बाकि सबकी बोलती बंद हो जाती है ।

रश्मी कॉलेज आकर एक खुला माहौल देखती है, लड़के-लड़कियों की खुली ज़िंदगी देखती है और ये माहौल उसे एक आज़ादी का एहसास कराता है लेकिन आज़ादी की हद क्या होनी चाहिए अक्सर नौजवान जवानी के जोश में ये भूल जाते हैं और रश्मी के साथ भी यही हुआ । रश्मी  बेहद हसीन और कमसिन लड़की थी । होंठ गुलाब की तरह लाल, कसा हुआ जिस्म, बड़ी-बड़ी आंखें ।

लड़कों को आकर्षित करने वाले सारे गुण रश्मी के पास थे और रश्मी इस आज़ादी का पूरा मज़ा लेना चाहती थी ।

वो भी चाहती थी कि उसे लड़कों की अटेंशन मिले, लड़के उसे नोटिस करें और उसके पीछे रहें लेकिन कभी-कभी ये दाव लड़कियों पर ही भार पड़ जाता है । जवानी और कुंवारेपन की आंधी में रश्मी बह रही थी और तभी उसकी नज़र यश पर पड़ी ।

यश एक खूबसूरत नौजवान लड़का था और रश्मी से सीनियर था । यश को देखते ही रश्मी उसकी तरफ आकर्षित हो गई और यही आकर्षण रश्मी को उस दलदल में ले गया जहाँ वो जाना तो चाहती थी लेकिन उसका अंत दुख था । यश अमीर बाप की बिगड़ी औलाद था । पहनने को बैंडेड कपड़े, घूमने को महंगी कार, खर्च करने के लिए हज़ारों रूपए और दिखने में तो वो खूबसूरत था ही ।

telugu romantic stories पूरा कॉलेज उसकी अय्याशी के चर्चे सुन चुका था

और देख रहा था बावजूद इसके रश्मी को फेमस होना था और उस लिहाज से भी रश्मी यश की तरफ आकर्षित हो चुकी थी । यश को ये समझने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी कि रश्मी उसकी तरफ आकर्षित हो चुकी है इसलिए उसने पहले रश्मी को थोड़ा तड़पाया और फिर तड़पाने के बाद रश्मी से बात-चीत बढ़ाई और एक दिन पार्क में बैठे-बैठे

  • रश्मी ने कहा – यश मैं तुमसे प्यार करती हूं, आई लव यू
  • यश – सच
  • रश्मी – हाँ, आई एम मैड फॉर यू, मैं तुम्हारे पीछे पागल हूं
  • यश ये मौका नहीं चूकना चाहता था उसने फौरन हाँ कहा और रश्मी के गालों और होठों पर चुंबन कर दिया । 

ये रश्मी का पहला चुंबन था जो उसके तन-बदन में आग लगा रहा था ।

उसकी जवानी जैसे खिल गई और उसे उस सुख का आंनद आया जो हर औरत या महिला लेना चाहती है । उस दिन की किस के बाद रश्मी तो जैसे यश की दीवानी हो गई । यश अपने तरीकों से खेल रहा था, हमेशा लड़कियों से घिरा रहने वाला यश रशमी को भी उन्हीं तमाम लड़कियों की तरह मान रहा था जिनके साथ वो अक्सर वक्त बीताता था । 

यश को रश्मी की मुलाकातें बढ़ने लगी और उनके बीच करीबियां धीरे-धीरे

सारी हदें तोड़ रही थी और दोनों के बीच फांसला कम होता जा रहा था । एक दिन दोनों रात को पार्टी करके लौट रहे थे तो यश ने रश्मी से कहा – रात हो गई है, मैं अपनी गाड़ी में तुम्हें छोड़ने चलता हूं, तुम टैक्सी मत करो । रश्मी ने हामी भर दी । गाड़ी अब धीरे-धीरे चल रही है और गाड़ी के अंदर गर्माहट बढ़ रही है क्योंकि दोनों सारी दिवारें तोड़ देना चाहते हैं और एक होकर एक-दूजे को महसूस करना चाहते हैं ।

telugu romantic stories यश ने गाड़ी रोकी और काले शीशे चढ़ा लिए और धीरे-धीरे रश्मी की और बढ़ने लगा ।

रश्मी भी पहले से ही खुद को यश कौ सौंप चुकी थी । रश्मी ने इशारा कर दिया था । यश ने रश्मी को गरमाहट देनी शुरू की और रश्मी गरम होती चली गई । गरमा-गरमी में दोनों एक-दूसरे को महसूस करने लगे और एक दूसरे की खूशबू लेने लगे । मोम की तरह दोनों एक दूसरे में पिघलने लगे थे और और दोनों इस पैदा हुई गरमी के हिस्सेदार बनना चाहते थे ।

आग दोनों तरफ बराबर लग चुकी थी और अब तो भड़क रही थी ।

चुंबन से शुरू होने वाला सिलसिला अब स्पर्श की सीमाएं पार कर चुका था और अब तो दोनों के बीच रस्साकस्सी चल रही थी । दोनों एक दूसरे को दबा रहे थे, बाहों में ले रहे थे और पसीना-पसीना हो रहे थे । रश्मी वो महसूस कर रही थी जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था और यश उसे वो महसूस करवा रहा था । यश आगे की नहीं सोच रहा था क्योंकि ये उसके लिए एक खेल जैसा था लेकिन रश्मी के लिए ये मिलन की घड़ी थी और कुंवारेपन से अब वो बाहर आ रही थी ।

जवानी उसे नया अहसास महसूस करवा रही थी ।

कली पूरी तरह फूल बन रही थी और थोड़ी देर में वो पूरी तरह खिलने वाली थी । उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वो तो बस खिलना चाहती थी । यश उसे जवानी के झटके दे रहा था और रश्मी उसे प्यार समझ रही थी । लेकिन आगे जो होने वाला था वो किसी भी लिहाज से ठीक नहीं था । 2 महिने यूं ही प्यार की कहानी कभी बै़डरूम, कभी कार तो कभी किसी दोस्त के कमरे में चल रही थी लेकिन अचानक रश्मी की तबीयत बिगड़ने लगी और वो डॉक्टर के पास गई तो उसके पैर तले ज़मीन खिसक गई ।

वो माँ बनने वाली थी, उसके गर्भ में बच्चा ठहर चुका था ।

रश्मी को जैसे ही ये पता चला, उसे सदमा सा लगा और वो चक्कर खाकर गिर पड़ी । थोड़ी देर बाद जब उसे होश आया तो वो रोने लगी । मज़े की सज़ा अब सामने आ रही थी । उसने सबसे पहला फोन यश को किया और उसे मिलने के लिए बुलाया । 

  • यश ने जैसे ही ये सुना वो फटाक से बोला – अरे ओ, ये क्या बकवास कर रही है, पता नहीं कहाँ मज़े लिए और मुझपर थोप रही है ।
  • रशमी के कान के आगे मानों सब पर्दे खुल गए हों, वो जिसे प्यार समझ रही थी वो तो बस व्यापार था ।
  • जवानी और कुंवारेपन के जोश ने उसकी जिन आंखों को बंद कर दिया था, अब वो आंखें खुल गई थी ।
  • रश्मी रोने लगी और यश के आगे गिड़गिड़ाने लगी और बोली – यश, प्लीज़ कुछ करो, मेरी और मम्मी-पापा की बहुत बेज़ज्ती हो जाएगी, प्लीज़ कुछ करो ।

यश जानता तो था कि गलती उसकी है और वो ये भी जानता था

कि अगर मामला आगे बढ़ा तो टेस्ट में ये बात प्रूफ हो जाएगी कि ये उसी का बच्चा है इसलिए उसने सबसे पहले रश्मी को चुप करवाया और फिर उससे कहा – ठीक है, मुझे शाम तक वक्त दो, मैं कुछ करता हूं ।

शाम को यश ने रशमी को फोन किया और कहा – कि तुम अपने घर में कह दो

कि अगले दो दिन बाद में कॉलेज टीम के साथ जयपुर जा रही हूं और हम वहीं तुम्हारा एबोर्शन करवा लेंगे, मैनें सारी तैयारियाँ कर ली हैं । रश्मी ने हामी भर दी और दो दिन के बाद दोनों जयपुर पहुंचे । दोनों ने रात में एक होटल में नाम बदलकर कमरा लिया और दोनों इस सबसे बाहर आना चाहते थे लेकिन बाहर आ नहीं पा रहे थे ।

रश्मी रोने लगी तो यश ने उसे गले से लगा लिया और चुप करवाने लगा ।

दोनों ने एक दूसरे को कसकर गले लगा लिया और सारी रात एक दूसरे से चिपके रहे । सुबह होते ही यश रश्मी को एक अस्पताल ले गया और वहां उसका चैकअप करने के बाद उसे अंदर ले गए और उसका एबोर्शन करवा दिया ।

रश्मी और यश ने चैन की सांस ली और अपने जवानी के जोश और कुंवारेपन की आज़ादी को समझने लगे । ऐसा नहीं था कि इस घटना के बाद दोनों एक दूसरे से दूर हो गए, उनके बीच रिश्ते पहले जैसे ही रहे और दोनों एक दूसरे के साथ कईं रातें गुज़ारने लगे । यश भी अब कहीं न कहीं रश्मी को चाहने लगा था और यश की आंखों में रश्मी के लिए प्यार भी था और इज़्जत भी । telugu romantic stories

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